Saturday, 25 January 2020

सिर पर हिम का ताज सुशोभित


सिर पर हिम का ताज सुशोभित
जिस चरणों को धोता सागर
गंगा यमुना सारी नदियां
जहां पर भरती स्नेह की गागर.
जहां कबीर रहीम के दोहे
सिखलाते हैं प्रेम की आखर
जहां बुद्ध की सुंदर वाणी
कर देते हैं सत्य उजागर.
जहां गुरु नारायण होते
राम कृष्ण लेते अवतार
जहां मित्र के हाल पर रोते
करूणाकर के नेत्र  बेजार.
जहां कुरान की आयतें देती
अल्ला की रहमत अपार
 गीता की पावनता कहती
कर्म का फल है जीवन सार.
जहां भेद नहीं करता था
हिन्दू मुस्लिम के ललकार
क्यों भीषण आतंक मचाता
दिल्ली के बेशर्म गद्दार.
धूल धूसरित हो रही है
वीरों का स्नेहिल उपकार
जिसने शिशिर सर्द हवा को
झेला था भर के उदगार.
श्रद्धा सुमन करते हैं अर्पण
दिया जिन्होंने जीवन हार
उन धरणी सुत के यादों में
आज मनाये राष्ट्रीय त्योहार.
भारती दास ✍️

 

Thursday, 16 January 2020

चित्र यही है इस जीवन की


चित्र यही है इस जीवन की
प्रेम पिपासा उलझन मन की
अरमानों के उड़ते रथ पर
अभिलाषा के बढ़ते पथ पर
नूतन रमणी रुपसी बनकर
अगणित रुप उमंग की भरती...
चित्र यही है इस जीवन की....
पवन के झोंके संग हर्षाती
झूम झूम कर गीत सुनाती
चंचल बाला बन इतराती
कर्म कुसुम सी हर-पल खिलती
चित्र यही है इस जीवन की....
सुख दुख है अपना ही साथी
फिर क्यो ढोये क्षोभ उदासी
नित्य सुबह होती सुंदर सी
छलती रहती उम्र तृषा की ....
चित्र यही है इस जीवन की....
भारती दास ✍️



Tuesday, 31 December 2019

मधुर अतीत बन जाने को है


पल-पल क्षण-क्षण बीत रहा है
विदा ये अंतिम ले रहा है
खट्टी-मीठी यादें देकर
नम नयन को कर रहा है.
मधुर अतीत बन जाने को है
मृदु इतिहास रच जाने को है
मौन रुप स्मृति में बसकर
उत्सर्ग समस्त कर जाने को है.
नव प्रभात  में उत्साह समाये
नव आलोक अनुराग सिखाये
नव तुषार के सघन मिलन से
नव आह्लाद जीवन हर्षाये.
दुआ यही है यही चाह हो
कुंज द्वार पर हंसी अथाह हो
संवरे बचपन हंसे मनुज मन
हर पल मंगलमय प्रवाह हो.

भारती दास ✍️



Saturday, 28 December 2019

भाई याद बहुत आती है


भाईजी की पांचवी पुण्यतिथि पर वेदनापूर्ण श्रद्धांजली

भाई याद बहुत आती है
क्षण-क्षण उर को तड़पाती है....
लम्हा-लम्हा पल-पल गुजरा
भूल न पाई तेरा चेहरा
अश्क की धारा बह जाती है
हर शय हर कण कह जाती है
भाई याद बहुत आती है....
घर के कोने कोने में तुम
दहलीज़ों द्वारों में थे तुम
गूंज हंसी की छल जाती है
फिर धड़कन ये थम जाती है
भाई याद बहुत आती है....
त्योहारें आती बहुतेरे
मिल जाते हैं भूले बिसरे
आश दिलों की बढ जाती है
व्याकुल नजरें थक जाती है
भाई याद बहुत आती है....
भारती दास ✍️


Saturday, 16 November 2019

बिहार विभूति वशिष्ठ नारायण

बिहार विभूति वशिष्ठ नारायण
थे भारत के गणितज्ञ महान
जीवन भर जो रहे तपस्वी
करुण हुआ उनका अवसान.
विदेशों में कीर्ति बिखेर कर
बने विश्व की वे पहचान
जीनियसों के जीनियस कहलाये
पथ अभिशापित क्यों हुआ तमाम.
दुख विभावरी छलना बनकर
अंधकार में लिया समेट
विक्षिप्त हो गये हुये विलीन
दर्द-वेदना की चढ गये भेंट.
आपदाओं की अभिवृष्टि ने
उर को आहत किया अथाह
व्यथा-निराशा कठोर सी पीड़ा
अवशाद-विषाद से उठे कराह.
उनकी दशा पर मेदिनी रोयी
गगन भी शोक मनाता रहा
उखड़ी सांसे स्पंदन टूटा
बेजान थका तन सोता रहा.
थे अलौकिक ज्ञान की मूर्ति
प्रबुद्ध-शुद्ध विराट महान
चिर नमन है उन्हें जगत का
स्मरणीय हो उनका हर काम.

भारती दास ✍️



Saturday, 9 November 2019

आज रामजी लौटे हैं घर

आज रामजी लौटे हैं घर

दीप जलाये खुशी मनाये
इक दूजे को गले लगाये
स्वर्ग उतर आया है धरा पर
आज रामजी लौटे हैं घर....
कवि कल्पना में जीते हैं
लेकिन झूठ नहीं कहते हैं
तुलसी के मानस के ईश्वर
आज रामजी लौटे हैं घर....
पुण्य की धारा सदा सी बहती
कोमल शांत कथा सी कहती
विकल नीर बहता था झर-झर
आज रामजी लौटे हैं घर....
प्रेम से पागल हुआ जहां ये
मला अंग में रंग नया ये
रोम-रोम में पुलक है भरकर
आज रामजी लौटे हैं घर....
श्रद्धा है मंदिर-मस्जिद की
जैसे निर्गुण-सगुण की मूर्ति
उत्सव सा आया है अवसर
आज रामजी लौटे हैं घर....
राघव की महिमा है अनंत
दूर हुआ दुर्मति का दंभ
आदर्श रूप मर्यादा सुंदर
आज रामजी लौटे हैं घर.
भारती दास ✍️

Friday, 27 September 2019

हे माधव भादव बरसे मेह


हे माधव भादव बरसे मेह
रजनी गाती गीत सुहानी
पवन जगाते नेह,
हे माधव....
दामिनी दमके गगन ये गरजे
सिहरते कोमल देह,
हे माधव....
प्रेम पुलक है धरती अंबर
हर्षाते उर-गेह,
हे माधव....
झर-झर बहती जल की धारा
रचते छंद ये मेघ,
हे माधव....
भारती दास ✍️



Saturday, 24 August 2019

अखिल भुवन में जिनका वंदन


अरुण अधर पर वंशी रखकर
जो प्रेम राग को गाते हैं
वो मधुसूदन वो यदुनंदन
जग को अनुराग सिखाते हैं.
जिनके उर में राधा बसती
जो राधेश्याम कहाते हैं
दीनों के दुख हरने वाले
गोवर्धन को उठाते हैं.
सखा सुदामा के चरणों को
नयन नीर से धोते हैं
वो मनमोहन देवकीनंदन
दीनदयाल कहाते हैं.
ग्वालों के संग गाय चराते
 माखनचोर कहाते हैं
योगेश्वर के जन्म का उत्सव
भाव विभोर कर जाते हैं.
जिनके मुख से गीता निकली
जो जीवन ज्ञान सिखाते हैं
अखिल भुवन में जिनका वंदन
उनको शीश झुकाते हैं.

Happy Janmashtami
भारती दास ✍️


Wednesday, 14 August 2019

नयी सदी का गान है

नयी सदी का गान है
 भारत देश महान है
 विश्व की पहचान है
 गौरवमय अभिमान है.
 एक ही अरमान हो
 व्यर्थ ना बलिदान हो
 सुखमय सुबह-शाम हो
 हंसता हिन्दुस्तान हो
. देश प्रेम का भाव हो
आपस में सद्भाव हो
शांति का स्वभाव हो
 गांधी का प्रभाव हो.
 देना है संदेश ये
 स्वच्छ हो परिवेश ये
सुन्दरता का वेश ये
 अपना प्यारा देश ये.

 भारती दास ✍️

Saturday, 3 August 2019

विघ्नों को भी गले लगाते


जिनके संग में मिलकर मन की
दुख सुख रोष सुनाते हैं
जिनकी स्नेहिल उष्मा पाकर
मृदुल अधर मुस्काते हैं.
विघ्नों को भी गले लगाते
जो कांटों में राह बनाते हैं
वो श्रद्धा की मूरत बनकर
उर आंगन बस जाते हैं.
जीवन की मधुमय बसंत हो
या झुकी कमर की गोधूलि शाम
दुर्गम क्षण में साथ निभाते
वही मित्र की है पहचान.

मित्रता दिवस की शुभकामनाएं

भारती दास ✍️