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Friday, 27 September 2019

हे माधव भादव बरसे मेह


हे माधव भादव बरसे मेह
रजनी गाती गीत सुहानी
पवन जगाते नेह,
हे माधव....
दामिनी दमके गगन ये गरजे
सिहरते कोमल देह,
हे माधव....
प्रेम पुलक है धरती अंबर
हर्षाते उर-गेह,
हे माधव....
झर-झर बहती जल की धारा
रचते छंद ये मेघ,
हे माधव....
भारती दास ✍️



Saturday, 30 June 2018

आये कौन दिशा से सजल घन


आये कौन दिशा से सजल घन
बरसाये तुम जल-कण , आये....
दिशा-दिशा से घूम के आये
स्वजन नेह सन्देश सुनाये
छलक उठा है लोचन
बरसाये तुम जल-कण , आये ....
तृप्त हुए वसुधा के अंतर
उर के मयूरा नाचे मन-भर
पुलक उठा चित्त उपवन
बरसाये तुम जल-कण , आये ....
पगडंडी खेतों के सूखे
पलक बिछाये रास्ता देखे
हर्ष उठा है कण-कण
बरसाये तुम जल-कण , आये ....
उजले-उजले बूंदे गिरते
तड़ित मेह में लुक-छिप करते
उमंग भरा है तन-मन
बरसाये तुम जल-कण , 
आये....      
भारती दास ✍️ 
   

Saturday, 25 November 2017

वो ह्रदय नहीं वो पत्थर है



वो ह्रदय नहीं वो पत्थर है
जिसमें बहती रसधार नहीं ,
जिस पुष्प में कोइ गंध नही                              
वहां भौरों की गुंजार नहीं , वो......
मुरझा जाता है, मर जाता है
 जीवन की आशा खो जाता है                         
जहाँ अपनापन का भाव नहीं
वहाँ होता सच्चा प्यार नहीं , वो......
है दरिद्र वही , है दीन वही
जिस व्यक्ति के उर में नेह नहीं
जहाँ संताप भरे आंसू बहते
वहाँ देता ख़ुशी करतार नहीं , वो .......
जो बसन्त में बस मुस्काता है
पतझर से जो घबराता है
जिस वृन्त में केवल शूल ही हो
वहाँ आता कभी बहार नहीं , वो......  
भारती दास ✍️ 

Tuesday, 31 January 2017

आया वही मधुमय बसंत



सदमय बसंत मदमय बसंत
आया वही मधुमय बसंत
पेड़ों पर पत्ते डोलते
नव गात से मन मोहते
उर में उमंगें है भरे
तनमन ख़ुशी से झूमते,
नवमय बसंत मुदमय बसंत
आया वही मधुमय बसंत….
ऋतुराज की आई बहार
प्रफुलित हुई फूलों की डार
सुर-सुंदरी ने की श्रृंगार
झंकृत हुए वीणा के तार,
सुरमय बसंत शुभमय बसंत….
आया वही मधुमय बसंत.
खग की मधुर कलरव की शोर
कितनी सुहानी है ये भोर
बहके कदम मेरी किसकी ओर
खींचे कोई मेरे मन की डोर
रसमय बसंत सुखमय बसंत
आया वही मधुमय बसंत…..        
भारती दास ✍️ 

Saturday, 15 October 2016

शरद सुंदरी अभिनन्दन है



हे शरद सुंदरी अभिनन्दन है
तेरे सुन्दर अरुण चरण पर
मृदुल कुसुम करता वंदन है.
शरद सुंदरी अभिनन्दन है....
बीत गयी पावस की रातें
सजल सघन घन की बरसातें
दृश्य मनोरम मुग्ध नयन है
शरद सुंदरी अभिनंदन है....
स्वागत गीत गाती विहंगिनी
शशि मुख चूमती जल तरंगिणी
मधु बरसाता सोम किरण है
शरद सुंदरी अभिनन्दन है.....
हरसिंगार का फैला आंचल
ओस नहाई विविध सुमन-दल
हरशय हरपल में पुलकन है
शरद सुंदरी अभिनंदन है.....
खेतों में धाने लहराई
कास की फूलें भी मुस्काई
हर्षित जन का अंतर्मन है
शरद सुंदरी अभिनन्दन है.....
मादकता की अंगराई सी
सुन्दरता की परछाई सी
रूप मोहिनी छवि अनुपम है
शरद सुंदरी अभिनन्दन है.....
प्रकृति का ये रूप सुहाती
शुभ्र कल्पना ख्वाब सजाती
भाव अनेकों शुभ चिंतन है
शरद सुंदरी अभिनन्दन है.....