पिता हमेशा देते हैं प्यार
सुरक्षा और संस्कार
सशक्त सा सुविचार
सजग सा कुलाचार
स्वतंत्रता की गरिमा
सरलता की महिमा
समाज में सर्वत्र सम्मान
अस्तित्व की सुंदर पहचान
मृदु स्वप्न का देकर पंख
इन्द्रधनुषी सा स्नेह अंक
पीकर अवसाद का अश्क
निज का अधर रहता शुष्क
होता है भले ढ़ेरों विषाद
संतानों का करते हैं जयनाद
दुःख अनंत सब दर्द भूलाकर
सुख समस्त हर खुशी लुटाकर
मौन का मंत्र वो सीख लेते हैं
सहर्ष उम्र भर जी लेते हैं।
भारती दास ✍️