Friday, 19 June 2026

मौन का मंत्र सीख लेते हैं

 

पिता हमेशा देते हैं प्यार

सुरक्षा और संस्कार 

सशक्त सा सुविचार 

सजग सा कुलाचार 

स्वतंत्रता की गरिमा 

सरलता की महिमा 

समाज में सर्वत्र सम्मान 

अस्तित्व की सुंदर पहचान 

मृदु स्वप्न का देकर पंख 

इन्द्रधनुषी सा स्नेह अंक

पीकर अवसाद का अश्क

निज का अधर रहता शुष्क  

होता है भले ढ़ेरों विषाद 

संतानों का करते हैं जयनाद

दुःख अनंत सब दर्द भूलाकर

सुख समस्त हर खुशी लुटाकर

मौन का मंत्र वो सीख लेते हैं 

सहर्ष उम्र भर जी लेते हैं।

भारती दास ✍️

Thursday, 11 June 2026

उद्देश्य सफल हो जाता है

 

आनंद स्त्रोत बह रहा निरंतर

क्यों उदास होता है ये मन 

चिर नवीन ये चिर पुराण है

अमृतमय सा सुख स्पंदन।

प्रकृति करती है परिवर्तन

विचलित होता जड़ व चेतन 

नभ में उड़ते विहग ये कहते

जीवन एक संग्राम है हर क्षण।

क्यों हताश होता है ये मन

क्यों निराशा देती है मार 

है शिथिलता कैसा मन में

क्यों जीवन लगता बेकार।

जग के निर्मम कोलाहल में

शांति डूबी जाती  है 

विषमता के इस फैशन में

स्व-ज्योति बुझी जाती है।

देशभक्ति का ढोंग है भारी

कर्त्तव्य भाव भी सच्ची नहीं

सेवा-शिष्टाचार नहीं तो

निर्ममता भी अच्छी नहीं।

कितनी रातें बीती सिसकती

कितने आँसू बहाते हम

कहाँ से आये कहाँ है जाना

सोचकर यह घबराते हम।

वायु का सुन्दरतम झोंका

सुखद स्पर्श कर जाता है 

पुष्प नये खिलते डाली पर

पल अगले ही मुरझा जाता है।

नूतन चोला धारण करके

जीवन यात्रा निकल जाता है 

प्रभु चरणों में नतमस्तक हो

उद्देश्य सफल हो जाता है। 

भारती दास ✍️