Friday, 17 April 2026

समूह कार्य की प्रेरणा देकर

तितली और मधुमक्खी दोनों 

साथ में उपवन आती थी 

 पुष्प रस को पीने हेतु 

आपस में ही झगड़ती थी।

पुष्प पराग को मैं पीयूँगी

तितली यूँ मुस्का कर बोली 

मधुमक्खी ने कहा प्यार से 

हठ ना कर उड़ जाओ पगली।

है अधिकार मेरा ही पहले 

तितली फिर इठला कर बोली 

सुन्दरता के मद में उसने 

करती रही केवल अठखेली।

एक डाल पर बैठा था तोता 

दोनों को अपने पास बुलाया 

अधिकार से पूर्व है काम जरूरी

कुछ नैतिक चीजें भी समझाया।

तितली के सम्मुख हो वह बोला

पुष्प रस को यूँ ही पीती हो 

परोपकार का कार्य नहीं करती

अपने लिए ही तुम जीती हो।

रस एकत्र करती मधुमक्खी 

मीठा शहद बनाती है 

कुसुम पराग को बिखेरती रहती

बागों में पौधा बढ़ाती है।

वह श्रम निरंतर करती रहती 

समाज की सेवा करती है 

समूह कार्य की प्रेरणा देकर

सहयोग-समर्पण सिखलाती है।

भारती दास ✍️ 


Wednesday, 1 April 2026

तेरी महिमा गाये पुराण

 तेरी महिमा गाये पुराण

मैं मूढ़ मति भगवान

तेरी महिमा गाये पुराण।

तुम अंजनी के पूत प्यारे

तुम वैदेही के दुलारे

तुम रामदूत हनुमान

तेरी महिमा गाये पुराण।

तुम कालनेमि संहारक 

तुम रावण दर्प विदारक

तुम सेवक प्रिय सुखधाम

तेरी महिमा गाये पुराण।

तुम बुद्धि बल के आगर

तुम लाँघ गए थे सागर

तुम वायु पुत्र बलवान

तेरी महिमा गाये पुराण।

तुम भक्तों के उपकारी

तुम तुलसी के हितकारी

तुम शंकर के अभिमान

तेरी महिमा गाये पुराण।

भारती दास ✍️