विपत्तिग्रस्त ये देश हमारा
करता है नमन सदा तुम्हारा
निडर धीर-वीर सैनिक तुमसे
है सुरक्षित देश ये प्यारा।
भयभीत-डरावना सा कल का
गुजरा वो पलछिन रहा
आतंकी-उग्रवाद हमेशा
क्षण-क्षण करता छल रहा।
गोली के उन बौछारों से
तुमने अपने जान दिये
जब भी कोई संकट आता
तुम ही तो रक्षक बन गये।
अशक्त-वक्त की विकट राह में
राजनीती बन गयी कुरीति
घृणा-द्वेष ने जड़ को जमाया
रही ना अब वो पावन-प्रीति।
प्राण-प्रण से जूझते रहते
हँसते ही प्राण निकल जाता
ना उर में भय ना पांव में बेड़ी
जब तक ना धड़कन थम जाता।
भारती दास ✍️