Saturday, 3 December 2022

गीता वचन शुभ ज्ञान है

 पापमोचन -तापशोषण 

गीता वचन शुभ ज्ञान है,

कृष्ण की वाणी सुहानी से

सुखद मन प्राण है.

जन्म जीवन का जहां है

मौत निश्चित है वहां 

मत शोक कर हे पार्थ तुम

यही सत्य है हरदम यहां.

जो आज तेरा है यहां

वो दूसरे का होगा कल

क्या खोया है तुमने यहां पर 

जिसके लिए तेरा मन विकल.

जो होना है होकर रहेगा 

तू व्यर्थ में चिंता न कर 

कर्म ही कर्त्तव्य केवल 

फल जो विधाता दे मगर.

न अतीत में न भविष्य में

जीवन अभी इसी पल में है 

परिणाम की न कर आकांक्षा 

कर्म से ही पथ सफल है. 

आस्था न हो दूषित 

ये ग्रंथ कर्म प्रधान है

दुर्दशा न हो कभी

उस वचन का जो महान है.

भारती दास ✍️



Saturday, 26 November 2022

भीष्म की मन की व्यथा

 


हजारों साल से भी पुरानी

रणगाथा की अमिट कहानी

शांतनु नाम के राजा एक

थे कर्मठ उदार-विवेक.

गंगा के सौंदर्य के आगे 

झुक गये वे वीर अभागे

करनी थी शादी की बात

पर गंगा थी शर्त के साथ.

मुनि वशिष्ठ ने शाप दिया था

अष्ट वसु ने जन्म लिया था

देवतुल्य वसु थे अनेक

उनमें से थे देवव्रत एक.

कर्मनिष्ठ वे धर्मवीर थे

प्रशस्त पथ पर बढे वीर थे

अटल प्रतिज्ञा कर बैठे थे

विषम भार वो ले बैठे थे.

भीषण प्रण को लिए खड़े

नाम में उनके “भीष्म” जुड़े 

भीष्मपितामह वो कहलाये

कौरव-पांडव वंश दो आये.

वंश बढा और बढ़ी थी शक्ति

पर दोनों में नहीं थी मैत्री

शत्रु सा था उनमें व्यवहार

इक-दूजे में नहीं था प्यार.

सत्ता कहती कौन सबल है

प्रजा चाहती कौन सुबल है

किसका पथ रहा है उज्जवल

कौन बनेगा अगला संबल.

राज्य-सिंहासन ही वो जड़ था

जिसमें मिटा सब वीर अमर था

अपमान-मान ने की परिहास

छीन ली जीवन की हर आस.

छल-कपट से जीत हो जिसकी

पुण्य-प्रताप मिटे जीवन की

बस स्वाभिमान यही था अंतिम

युद्ध ही एक परिणाम था अंतिम.

महाभारत की भीषण रण में

मिट गये वीर अनेक ही क्षण में

धरती हुई खून से लाल

बिछड़ गये माता से लाल.

शर-शय्या पर भीष्म पड़े थे

नेत्र से उनके अश्क झड़े थे

आँखों में जो स्वप्न भरे थे

बिखर-बिखर कर कहीं पड़े थे.

बैर द्वेष इर्ष्या अपमान 

मिटा दिए वंशज महान

कुरुक्षेत्र का वो बलिदान

देती सीख हमें शुभ ज्ञान.

भारती दास✍️

Saturday, 19 November 2022

हे योगी तेरी किन भावों को मानूँ

 


हे योगी तेरी किन भावों को मानूँ  

हर रूपों में तुम ही समाये,

उन रूपों को पहचानूँ 

हे योगी .....

लघुता-जड़ता पशुता-हन्ता 

सब कर्मों के तुम ही नियंता 

उन अपराधों को जानूँ 

हे योगी .....

तुम से प्रेरित नील गगन है 

जिसमें उड़ता विहग सा मन है  

उन परवाजों को जानूँ 

हे योगी ......

दुर्गम पथ पर चलना सिखाते 

मुश्किल पल में लड़ना सिखाते

उन सदभावों को जानूँ 

हे योगी .....

भारती दास ✍️

Sunday, 13 November 2022

स्वर वर्ण का ज्ञान हो ( बाल कविता)

 अ - अनार के दाने होते लाल

आ - आम रसीले मीठे कमाल

इ -  इमली खट्टी होती है

ई  - ईट की भट्ठी जलती है

उ - उल्लू दिन को सोता है

ऊ - ऊन से स्वेटर बनता है

ऋ - ऋषि की पूजा करते हैं

 वो ईश्वर जैसे होते हैं.

ए - एक से गिनती होती है 

ऐ - ऐनक अच्छी लगती है 

ओ - ओस से धरती गीली है

औ - औषधि हमने पीली है

अं - अंगूर सभी को भाता है

अॅऺ - ऑख से ऑसू बहता है

अ: - प्रात: सूर्य निकलता है

     जग को रोशन करता है.

     स्वर वर्ण ही मात्रायें बनती

     शब्दों की रचनायें करती 

     कथ्य कई सारे कह देती

     भाव अनेकों उर में भरती.

     व्यंग्य नहीं ना शर्म हो

     अपनी भाषा पर गर्व हो 

     स्वर वर्ण का ज्ञान हो

     मात्रा की पहचान हो.

     भारती दास ✍️



Sunday, 6 November 2022

ब्रह्म बीज होती है विद्या

 ब्रह्म बीज होती है विद्या

जो स्वयं को ही बोधित करती है

अंतस की सुंदर जमीन पर

ज्ञान तरू बनकर फलती है.

हर कोई शिक्षा पाता है

कौशल निपुण बन जाता है

सिर ऊंचा करता समाज में

उत्थान में होड़ लगाता है.

लेकिन विद्या व्यवहार सिखाती

दंभ हरण कर देती है

मानस से तृष्णा हटाकर 

भाव करुण भर देती है.

शिक्षा रोजी रोटी देती

जिम्मेदारी का धर्म निभाती

सत्कर्मों को जोड़ती खुद से

विद्या हृदय को विकसित करती.

सर्वोत्तम है मानव जीवन

जो विद्या का मर्म सिखाते हैं 

शिक्षित हो मानव विद्या से

ज्ञान यही तो  कहते हैं.

 भारती दास ✍️

Sunday, 23 October 2022

जल गई दीपों की अवली

 जल गई दीपों की अवली

सज गई है द्वार और देहली

शक्ति का संचार कर गई

दीपमालिका मंगल कर गई

उर मधुर स्पर्श कर गई

निविड़ निशा में उमंग भर गई.

आभा धरा की दमक रही

सुख मोद से यूं चमक रही

हृदय-हृदय से पुलक रही

स्मित अधर पर खनक रही.

दिवस-श्रम का भार उठाये

दृग-दृग में अनुराग सजाये

दुर्गुण जलकर सद्गुण आयें

रमा-नारायण घर-घर आयें.

भारती दास ✍️

दीप-पर्व की अनंत शुभकामनाएं


Friday, 14 October 2022

पछताते हैं लोग भी अक्सर

 

एक विशाल पेड़ था हरा भरा
था छाया में जिसके ऊंट खड़ा
पथिक बैठते छांव में थककर
खग कुल गीत गाते थे सुखकर
तभी प्रलय बन आया तूफान
गिर पड़ा वृक्ष नीचे धड़ाम
नीड़ से बिखरे अंडे बच्चे
मर गये ऊंट भी हट्ठे कट्ठे
भूखे सियार ने देखा भोजन
हुआं हुआं कर हुआ प्रसन्न
अपने भाग्य को खूब सराहा
ईश्वर के प्रति प्रेम निबाहा
एक मेंढक भी कहीं से निकला
सियार का मन तो बल्लियों उछला
सोचा पहले मेढक को खाऊं
फिर सारा भोजन कर जाऊं
पर कूद गया मेढक जल्दी में
सियार समाया दलदल मिट्टी में
कुछ ही पल में सब घटित हुआ
विधि की लीला विदित हुआ
सियार ने जो भी था पाया
अधिक लोभ में सभी गंवाया
लालच के चक्कर में पड़कर
पछताते हैं लोग भी अक्सर.
भारती दास ✍️

Saturday, 8 October 2022

सुखद मनोरम आइ कोजगरा

 

सुखद मनोरम आइ कोजगरा
बरसै गगन सं पीयूषक धारा....
राधा रमण संग रासक क्रीड़ा
मधुर मखान संग पानक बीड़ा
सुखद मनोरम आइ कोजगरा....
मुग्ध नयन सं झरै अछि नीरा
पुलकित अछि मन प्राण शरीरा
सुखद मनोरम आइ कोजगरा....
शरद विभावरी हर्षित चहुं ओरा
माधव मुरली मगन चित्त चोरा
सुखद मनोरम आइ कोजगरा....
मुदित बहै अछि शीतल समीरा
पूरत मनोरथ मेटत सब पीड़ा
सुखद मनोरम आइ कोजगरा....
भारती दास ✍️
(मैथिली गीत)
शरद पूर्णिमा के हार्दिक शुभकामना

Saturday, 1 October 2022

बाल कविता

 बाल कविता

 गांधी जी के तीन बंदर

 कहते सबसे बातें सुंदर

 सच से कभी भी डरो नहीं

 कड़वी बातें करो नहीं

 चीजें गंदी देखो नहीं

 कभी किसी से लड़ो नहीं 

 तुम नन्हे-मुन्ने न्यारे हो 

 गांधी जी के प्यारे हो

 भारत मां के दुलारे हो

 तुम ही उगते सितारे हो.

 शास्त्री जी के थे अरमान

  बढे देश की हरदम आन

  विश्व गांव में हो पहचान

  शिक्षा सभ्यता बने महान

  जहां पवित्र है गीता पुराण

  कर्म ही पूजा कर्म ही ज्ञान

  जहां लुटाते सैनिक जान

  गर्व  हमें है उनपर शान

  वो भूमि है पावन धाम

  जय जवान जय किसान.

  गांधी-शास्त्री जयंती की 

  हार्दिक शुभकामनाएं

भारती दास ✍️






Monday, 26 September 2022

देवी प्रार्थना


वर दय हरू कष्ट हमर मैया 

बड़ देर सं आश लगेने छी

अवलंब अहीं छी व्यथित मनके

विश्वासक दीप जरेने छी

वर दय हरू.....

छी मूढ मति कोना ध्यान करू

हे दुर्गा अहां कल्याण करु

अछि पथ दुर्गम हे जगत जननी

अपराध कतेको कयने छी

वर दय हरू.....

हम मंत्र तंत्र नै जानै छी

अनुदान स्नेह के मांगै छी

हे शैल सुता स्वीकार करू

पद में मद अर्पण कयने छी

वर दय हर......

दुर्गा पूजा के हार्दिक शुभकामनाएं


(मैंथिली गीत)

भारती दास ✍️