Wednesday, 22 July 2026

छम-छम बरसती वर्षा रानी

 छम-छम बरसती वर्षा रानी 

उजली सी बूंदें लगती सुहानी....

खुशी है कहीं पर, कहीं पर हँसी है 

कहीं आपदा बनकर बरसी है 

सुख-दुःख जैसा ही उसकी कहानी 

छम-छम बरसती वर्षा रानी....

सरिता की धारा मद में बहती 

प्रलय स्वरुप बन नद में मिलती

तरल-गरल बन आती श्रावणी 

छम-छम बरसती वर्षा रानी....

चपला चमकती चूमती नभ को 

कौन-कहाँ पर प्राणी कब हो

क्षण में ही ज्वाला बनती दामिनी 

छम-छम बरसती वर्षा रानी....

सांध्य की सुंदर सी घनमाला

रमणीय लगती प्रकृति-बाला

मन अनुरागिनी वयस सयानी

छम-छम बरसती वर्षा रानी....

भारती दास ✍️