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Saturday, 27 March 2021

मै कृतज्ञ हूं हे परमेश्वर

 

रुके-रुके से थके-थके से
कदम जोश से बढ़ेंगे फिर से
कई विघ्न के शिला पड़े थे
समस्त तन-मन हंसेंगे फिर से.....
तड़प-तड़प कर सहम-सहम कर
रात-दिन यूं ही कट रहे थे
उम्मीद आश की लिये पड़े थे
वासंती पुष्पें खिलेंगे फिर से.....
इंद्रधनुष की बहुरंगों सी
विचरते चित्त में भाव कई सी
द्वन्द के साये में जी रहे थे
सुनहरे पल-क्षण मिलेंगे फिर से.....
मैं कृतज्ञ हूं हे परमेश्वर
धन्यवाद करती हूं ईश्वर
अंधकार पथ में बिखरे थे
छंद आनंद के लिखेंगे फिर से.....
भारती दास



 

Saturday, 28 November 2020

गुजरते हैं सुखों के क्षण

 

गुजरते हैं सुखों के क्षण
दुखों के पल गुजर जाते
समय की तय है सीमायें
सदा वो पल नहीं रहते....
गमों से जो नहीं डरते
सुखों में भी वही जीते
नहीं तो दर्द-पीड़ा-गम
मन झकझोर देते हैं....
ये रिश्ते हैं ये नाते हैं
ये बनते हैं बिगड़ते हैं
कभी देते हंसी में संग
कभी मुंह मोड़ लेते हैं....
जरा सोचें जरा समझें
यही जीवन है ये जानें
देते हैं हमें वो सीख
जो ज्यादा शोर करते हैं....
बहारें ये सिखाती है
पतझड़ भी तो साथी है
जीये हरदम सहज होकर
कठिन जब दौर होते हैं....
गुजरते हैं....
दुखों के....
भारती दास



 

 

Friday, 13 November 2020

दीपों की पंक्ति कहती हैं

 



अंतर मन का यही सपना है
एक नेह का दीपक जलता रहे
ना शोर मचे ना होड़ चले
घर-आंगन का तम मिटता रहे.
दहलीज सभी का रोशन हो
तिमिर कभी ना अथाह रहे
स्नेह रहित ना संवेदन हो
जुड़े सदा मन चाह रहे.
ये पर्व प्रभा का महज ना हो
सर्वत्र सहज लालित्य रहे
चिंतन में किरण का उत्सव हो
एकता का शुभ सौंदर्य रहे.
परिवर्तन संभव हो न सके
बदलाव उजास की होता रहे
बल्वों की चादर चमके मगर
महत्ता दीपक की खास रहे.
समरसता का उत्सव है ये
ऊर्जा-आभा-सम्मान रहे
दीपों की पंक्ति कहती है
व्यक्ति में ना अभिमान रहे.
भारती दास ✍️
दीवाली पंचमहोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं



 

 

Friday, 2 October 2020

गांधी शिक्षण जरुर हो

 

यह वर्ष है विक्षोभ का
दर्द क्लेश क्षोभ का
सद्भावना शून्य है
संवेदना नगण्य है
वेदना अपार है
तड़प हाहाकार है
मानवता दरकिनार है
सुरक्षा लाचार है
बिगड़ती हालात है
दुष्कर्म बढता घात है
विवशता मोहताज है
आशंकित समाज है
शास्त्री जी के देश में
है कमी कहां परिवेश में
गांधी जी के वेश में
है जीवन ही संदेश में
लक्ष्य सदैव भरपूर हो
अनगढ आदत दूर हो
अंतर्मन ना मजबूर हो
गांधी शिक्षण जरुर हो.
गांधी शास्त्री जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
भारती दास


 

Monday, 31 August 2020

बरस रहा है मेघ निरंतर

  बरस रहा है मेघ निरंतर

अनवरत आवेग से भरकर

प्रचंड कोई अभियान सी लेकर

निर्बल जीवन प्राण को हरकर.

जल प्लावन से जान सिसकते

प्रलय सिंधु अरमान निगलते

सघन गगन प्रतिदिन बरसते

सुख वैभव की बस्ती डूबते.

आतप वेदना दृश्य डरावना

वीभत्स भयानक भू का कोना

बहती है कातर सी नयना

कहर बाढ़ का छीना हंसना.

मनुज आसरा बह रहा है

निर्वाह सहज ही ढह रहा है

सर्वत्र ये पीड़ा कह रहा है

कर्त्तव्य किसका कम रहा है.

कर्म साधना हो गई है क्षीण

सामर्थ्य हीन साधन विहीन

दिन मुश्किल के रातें मलीन

दूर कब होगा गम ये असीम.

भारती दास







Tuesday, 4 August 2020

मुग्ध खड़े भगवान

साकेत नगर में द्वार-द्वार पर
मुग्ध खड़े भगवान
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
राजा दशरथ थे बड़भागी
माता कौशल्या के पुण्य जागी
जन्म लिये रघुवर हरने को
दुख धरती के तमाम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
स्वप्न मनोहर पूर्ण हो आया
रामनिकेत क्षण क्षण मुस्काया
आनंद मोद है मगन लोग है
मन विभोर अभिराम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
शंखध्वनि का स्वर गूंजित है
राम राम मुख से वर्णित है
रूप मोहिनी पाप मोचनी
हंसी अधर पे ललाम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
जय-जयकार करे रघुराई
चरण कमल में शीश नवाई
भक्त संत मुनि के आराधक
हे निर्बल के राम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
भारती दास




 




Wednesday, 22 July 2020

मधुश्रावणी का त्योहार


घन गरजे चपला चमके
नभ से छम-छम जल बरसे
गाये मस्त पवन मल्हार
मधुश्रावणी का त्योहार....
पावस की प्यारी रातें
करती चंचल उर गातें
दृग में भरते मनुहार
मधुश्रावणी का त्योहार....
मेंहदी रचते हाथों में
सपने सजते आंखों में
प्रियवर का प्रेम-फुहार
मधुश्रावणी का त्योहार....
सुहागन करती श्रृंगार
गाती मंगलगीत उदार
चित्त में उत्साह अपार
मधुश्रावणी का त्योहार....
कण-कण में हरियाली है
तन-मन में खुशहाली है
सावन का ये उपहार
मधुश्रावणी का त्योहार.....
हर्षित हो करते वंदन
गौरी-शंकर की अर्चन
भर आंचल में उदगार
मधुश्रावणी का त्योहार.....
भारती दास ✍️
('
हरियाली तीज' को ही बिहार में   ' 'मधुश्रावणी तीज' कहते हैं)



 



Wednesday, 15 July 2020

करे महसूस सबका गम


अगर अनमोल है जीवन
कोरोना को हराना है
करे सारे नियम पालन
कोरोना को हराना है.
रहे घर में सहज बनकर
सफाई हो महज सुंदर
गर महफूज हो दामन
कोरोना को हराना है.
जरूरी हो तभी निकले
लगाकर मास्क को टहले
चले दूरी बनाकर जन
कोरोना को हराना है.
धरती पर ये बिखरा है
लोगों से ही पसरा है
रखे धीरज सदा संयम
कोरोना को हराना है.
न जाने कब कहां क्या हो
कहीं ये रोग थामे जो
बचे हर सांस की धड़कन
कोरोना को हराना है.
ना हो बलिदान अब तन की
यही अरमान हो मन की
करे महसूस सबका गम
कोरोना को हराना है.
जीना है या मरना है
सुनिश्चित आज करना है
अडिग अपना हो ये चिन्तन
कोरोना को हराना है.
भारती दास

 


Monday, 6 July 2020

वन्दे गुरुवर वन्दे महेश्वर

https://vinbharti.blogspot.com/


आया सावन सूना है मन
बूंद न बरसा छलका है गम
संकट में शिव का आराधन
देव नही मंदिर के प्रांगण.
सांझ प्रात करते हैं वंदन
टेर सुनाता चंचल चितवन
ढूंढ रहा छवि ईश का अनुपम
छोड़ चले हर सीमा बंधन.
नेह में डूबी स्नेह से सिमटी
लहू-लिपटी धरती की मिट्टी
पथराई आंखों से कहती
मिट जायेगी ख्वाहिश किसकी.
दंभी बनकर धमकाते हैं
अनुचित कार्य किये जाते हैं
दोषहीन दंडित होते हैं
आहत  होते मर जाते हैं.
तांडव नृत्य न कर अंबर पर
थाम लो कर हे नाथ दिगंबर
हर-हर बोले भोले-शंकर
वन्दे गुरुवर वन्दे महेश्वर.
शुभ्र रुप कर लो अब धारण
महके-दमके जग का आनन
प्रेम का सावन बरसे आंगन
चहके प्रीत मधुर-मनभावन.
भारती दास