Saturday, 12 December 2020

कवि मन यूं विचलित न होना

 

कवि मन यूं विचलित न होना
चित्त विकल हो,नेत्र सजल हो
दर्द अनंत हो ढोना,  
कवि मन यूं विचलित न होना....
शब्द वाण से आहत होकर
व्याकुलता घबराहट भरकर
किन्चित चैन न खोना,
कवि मन यूं विचलित न होना....
सूर्य   चंद्र अवलोक रहा है 
किसको कहो ना क्षोभ रहा है
पीड़ित दुखित   न रोना,
कवि मन यूं विचलित न होना....
व्यर्थ ना हठ कर, संकट मत कर
जीवन के कंटक-मय पथ-पर
व्यथित न कर उर-कोना,
कवि मन तू यूं विचलित न होना....
भारती दास


 

Saturday, 28 November 2020

गुजरते हैं सुखों के क्षण

 

गुजरते हैं सुखों के क्षण
दुखों के पल गुजर जाते
समय की तय है सीमायें
सदा वो पल नहीं रहते....
गमों से जो नहीं डरते
सुखों में भी वही जीते
नहीं तो दर्द-पीड़ा-गम
मन झकझोर देते हैं....
ये रिश्ते हैं ये नाते हैं
ये बनते हैं बिगड़ते हैं
कभी देते हंसी में संग
कभी मुंह मोड़ लेते हैं....
जरा सोचें जरा समझें
यही जीवन है ये जानें
देते हैं हमें वो सीख
जो ज्यादा शोर करते हैं....
बहारें ये सिखाती है
पतझड़ भी तो साथी है
जीये हरदम सहज होकर
कठिन जब दौर होते हैं....
गुजरते हैं....
दुखों के....
भारती दास



 

 

Friday, 13 November 2020

दीपों की पंक्ति कहती हैं

 



अंतर मन का यही सपना है
एक नेह का दीपक जलता रहे
ना शोर मचे ना होड़ चले
घर-आंगन का तम मिटता रहे.
दहलीज सभी का रोशन हो
तिमिर कभी ना अथाह रहे
स्नेह रहित ना संवेदन हो
जुड़े सदा मन चाह रहे.
ये पर्व प्रभा का महज ना हो
सर्वत्र सहज लालित्य रहे
चिंतन में किरण का उत्सव हो
एकता का शुभ सौंदर्य रहे.
परिवर्तन संभव हो न सके
बदलाव उजास की होता रहे
बल्वों की चादर चमके मगर
महत्ता दीपक की खास रहे.
समरसता का उत्सव है ये
ऊर्जा-आभा-सम्मान रहे
दीपों की पंक्ति कहती है
व्यक्ति में ना अभिमान रहे.
भारती दास ✍️
दीवाली पंचमहोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं



 

 

Friday, 2 October 2020

गांधी शिक्षण जरुर हो

 

यह वर्ष है विक्षोभ का
दर्द क्लेश क्षोभ का
सद्भावना शून्य है
संवेदना नगण्य है
वेदना अपार है
तड़प हाहाकार है
मानवता दरकिनार है
सुरक्षा लाचार है
बिगड़ती हालात है
दुष्कर्म बढता घात है
विवशता मोहताज है
आशंकित समाज है
शास्त्री जी के देश में
है कमी कहां परिवेश में
गांधी जी के वेश में
है जीवन ही संदेश में
लक्ष्य सदैव भरपूर हो
अनगढ आदत दूर हो
अंतर्मन ना मजबूर हो
गांधी शिक्षण जरुर हो.
गांधी शास्त्री जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
भारती दास


 

Saturday, 19 September 2020

गुमराह हो रहा युवा

 

https://vinbharti.blogspot.com/2020/09/blog-post_19.html

धुआं-धुआं हुआ जहां
गली-गली यहां-वहां
नशे में झूमता फिज़ा
विनाश पथ चला युवा.
चुनौतियों से भागता
विकृतियों को थामता
क्षुद्र-स्वार्थ के लिए
अपराध कर रहा युवा.
महत्त्वाकांक्षा की राह में
सफलता की चाह में
होनहार बोधवान
गुनाह कर रहा युवा.
विलासिता में पल  रहा
अश्लीलता में ढल रहा
कुपथ-कुसंग के लिए
विद्रोह कर रहा युवा.
स्वछंदता प्रमुख रही
ममता बिलख रही
घर-समाज के लिए
गुमराह हो रहा युवा.
गुरुर किसको है यहां
कुसूर किसका है कहां
मिथ्या मान के लिए
मदान्ध बन रहा युवा.
भारती दास




 

 

Sunday, 13 September 2020

पहचान हिंद की हिंदी है

" अंग्रेजी में ना होगा काम

फिर ना बनेगा देश गुलाम

डॉ लोहिया की थी अभिलाषा

चले देश में देशी भाषा "

सन पैंसठ में लगे थे नारे

उमंग जोश में भरे थे सारे

छात्रों ने की थी आंदोलन

किये प्रयास अनेक परिश्रम

डरी सहमी सरकार हिली थी

अंग्रेजी की विदाई दिखी थी

लोहिया जी का हुआ निधन

कमजोर हुआ जोशीला मन

संविधान से किया मजाक

बनी नहीं हिन्दी बेबाक

उन्नत हिंदी अंगीकार नही था

नेताओं को स्वीकार नही था

अंग्रेजी बन गई उनकी जुबानी

मानसिकता में बस गई गुलामी

पर-भाषा को सिरमौर बताया

निज भाषा को  गैर बनाया

नई पीढ़ी की हिंदी भाषा

शायद ही बन पाये आशा

हुई दुर्दशा हुआ अन्याय

मिली उपेक्षा मिला न न्याय

जन आदर्श हुये हैं जितने

ज्ञान रश्मि फैलाये जिसने

भक्त कवियों ने कही ये बात 

है हिंदी में अपनत्व की बास 

स्वीकार करें मन से ये  भाषा

जिसको  अनपढ़ भी पढ़  पाता

पहचान हिंद की हिंदी है

अभिमान हिंद की हिंदी है.

भारती दास ✍️


Friday, 4 September 2020

वे शिक्षक पूर्ण सर्वज्ञ थे

 

महान विल़क्षण राधा-कृष्णन
अप्रतिम योग्यता प्रतिभा संपन्न
थे अध्यापक था उदार अध्यापन
दिव्य थी उनकी विद्या अध्ययन.
न राग न रोष न द्वेष न कुंठन
वे अजातशत्रु थे नहीं था दुश्मन
समस्याओं का करते उन्मूलन
अमूल्य थी उनकी निष्ठा दर्पण.
साहित्य सदा हो सार्थक शिक्षण
संदेश था उनका ज्ञान हो अर्जन
अद्भुत थी उनकी सेवा समर्पण
थे प्रखर मनीषी मुखर अनुगूंजन.
वे शिक्षक पूर्ण सर्वज्ञ थे
वे शुभ चिंतक मर्मज्ञ थे
वे संस्कृति धर्म विशेषज्ञ थे
वे श्रेष्ठ पुरुष बहु विज्ञ थे.
भारती दास

 

 

Monday, 31 August 2020

बरस रहा है मेघ निरंतर

  बरस रहा है मेघ निरंतर

अनवरत आवेग से भरकर

प्रचंड कोई अभियान सी लेकर

निर्बल जीवन प्राण को हरकर.

जल प्लावन से जान सिसकते

प्रलय सिंधु अरमान निगलते

सघन गगन प्रतिदिन बरसते

सुख वैभव की बस्ती डूबते.

आतप वेदना दृश्य डरावना

वीभत्स भयानक भू का कोना

बहती है कातर सी नयना

कहर बाढ़ का छीना हंसना.

मनुज आसरा बह रहा है

निर्वाह सहज ही ढह रहा है

सर्वत्र ये पीड़ा कह रहा है

कर्त्तव्य किसका कम रहा है.

कर्म साधना हो गई है क्षीण

सामर्थ्य हीन साधन विहीन

दिन मुश्किल के रातें मलीन

दूर कब होगा गम ये असीम.

भारती दास







Thursday, 20 August 2020

सतीनाम स्तुति

 https://vinbharti.blogspot.com/2020/08/blog-post_20.html

सतीनाम स्तुति
शंभुप्रिया जय आदि भवानी
आर्या अपर्णा उमा वदामि
दुर्गा अनंता जया ब्रम्हाणी
सती स्वरुपा तुभ्यम नमामि
शंभुप्रिया जय आदि भवानी.....
जय शिवयोगिनी जय शिवरुपिणी
जय माहेश्वरी महा तपस्विनी
जय रुद्राणी वृषभ वाहिनी
जयति गिरजा शुभम करोमि
शंभुप्रिया जय आदि भवानी.....
दरिद्र मोचनी सत्य स्वरूपिणी
जगत मोहिनी जग हितैषिणी
महातपा जय पुरारि भामिनी
सर्वप्रदायिनी वरम ददामि
शंभुप्रिया जय आदि भवानी.....
जय चित्रा भवप्रीता भाविनी
आयुधधारिणी जय शर्वाणी
वनदुर्गा जय शैलविहारिणी
भवभयहारिणी नित्यम भजामि
शंभुप्रिया जय आदि भवानी.....
भारती दास


 

 

Tuesday, 4 August 2020

मुग्ध खड़े भगवान

साकेत नगर में द्वार-द्वार पर
मुग्ध खड़े भगवान
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
राजा दशरथ थे बड़भागी
माता कौशल्या के पुण्य जागी
जन्म लिये रघुवर हरने को
दुख धरती के तमाम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
स्वप्न मनोहर पूर्ण हो आया
रामनिकेत क्षण क्षण मुस्काया
आनंद मोद है मगन लोग है
मन विभोर अभिराम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
शंखध्वनि का स्वर गूंजित है
राम राम मुख से वर्णित है
रूप मोहिनी पाप मोचनी
हंसी अधर पे ललाम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
जय-जयकार करे रघुराई
चरण कमल में शीश नवाई
भक्त संत मुनि के आराधक
हे निर्बल के राम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
भारती दास