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कवि मन यूं विचलित न होना
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कवि मन यूं विचलित न होना
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गुजरते हैं सुखों के क्षण
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यह वर्ष है विक्षोभ का
दर्द क्लेश क्षोभ का
सद्भावना शून्य है
संवेदना नगण्य है
वेदना अपार है
तड़प हाहाकार है
मानवता दरकिनार है
सुरक्षा लाचार है
बिगड़ती हालात है
दुष्कर्म बढता घात है
विवशता मोहताज है
आशंकित समाज है
शास्त्री जी के देश में
है कमी कहां परिवेश में
गांधी जी के वेश में
है जीवन ही संदेश में
लक्ष्य सदैव भरपूर हो
अनगढ आदत दूर हो
अंतर्मन ना मजबूर हो
गांधी शिक्षण जरुर हो.
गांधी शास्त्री जयंती की हार्दिक
शुभकामनाएं
भारती दास ✍️
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https://vinbharti.blogspot.com/2020/09/blog-post_19.html
धुआं-धुआं हुआ जहां
गली-गली यहां-वहां
नशे में झूमता फिज़ा
विनाश पथ चला युवा.
चुनौतियों से भागता
विकृतियों को थामता
क्षुद्र-स्वार्थ के लिए
अपराध कर रहा युवा.
महत्त्वाकांक्षा की राह में
सफलता की चाह में
होनहार बोधवान
गुनाह कर रहा युवा.
विलासिता में पल रहा
अश्लीलता में ढल रहा
कुपथ-कुसंग के लिए
विद्रोह कर रहा युवा.
स्वछंदता प्रमुख रही
ममता बिलख रही
घर-समाज के लिए
गुमराह हो रहा युवा.
गुरुर किसको है यहां
कुसूर किसका है कहां
मिथ्या मान के लिए
मदान्ध बन रहा युवा.
भारती दास ✍️
" अंग्रेजी में ना होगा काम
फिर ना बनेगा देश गुलाम
डॉ लोहिया की थी अभिलाषा
चले देश में देशी भाषा "
सन पैंसठ में लगे थे नारे
उमंग जोश में भरे थे सारे
छात्रों ने की थी आंदोलन
किये प्रयास अनेक परिश्रम
डरी सहमी सरकार हिली थी
अंग्रेजी की विदाई दिखी थी
लोहिया जी का हुआ निधन
कमजोर हुआ जोशीला मन
संविधान से किया मजाक
बनी नहीं हिन्दी बेबाक
उन्नत हिंदी अंगीकार नही था
नेताओं को स्वीकार नही था
अंग्रेजी बन गई उनकी जुबानी
मानसिकता में बस गई गुलामी
पर-भाषा को सिरमौर बताया
निज भाषा को गैर बनाया
नई पीढ़ी की हिंदी भाषा
शायद ही बन पाये आशा
हुई दुर्दशा हुआ अन्याय
मिली उपेक्षा मिला न न्याय
जन आदर्श हुये हैं जितने
ज्ञान रश्मि फैलाये जिसने
भक्त कवियों ने कही ये बात
है हिंदी में अपनत्व की बास
स्वीकार करें मन से ये भाषा
जिसको अनपढ़ भी पढ़ पाता
पहचान हिंद की हिंदी है
अभिमान हिंद की हिंदी है.
भारती दास ✍️
महान विल़क्षण राधा-कृष्णन
अप्रतिम योग्यता
प्रतिभा संपन्न
थे अध्यापक था उदार
अध्यापन
दिव्य थी उनकी
विद्या अध्ययन.
न राग न रोष न द्वेष
न कुंठन
वे अजातशत्रु थे
नहीं था दुश्मन
समस्याओं का करते
उन्मूलन
अमूल्य थी उनकी
निष्ठा दर्पण.
साहित्य सदा हो
सार्थक शिक्षण
संदेश था उनका ज्ञान
हो अर्जन
अद्भुत थी उनकी सेवा
समर्पण
थे प्रखर मनीषी मुखर
अनुगूंजन.
वे शिक्षक पूर्ण
सर्वज्ञ थे
वे शुभ चिंतक
मर्मज्ञ थे
वे संस्कृति धर्म
विशेषज्ञ थे
वे श्रेष्ठ पुरुष
बहु विज्ञ थे.
भारती दास ✍️
बरस रहा है मेघ निरंतर
अनवरत आवेग से भरकर
प्रचंड कोई अभियान सी लेकरनिर्बल जीवन प्राण को हरकर.जल प्लावन से जान सिसकतेप्रलय सिंधु अरमान निगलतेसघन गगन प्रतिदिन बरसतेसुख वैभव की बस्ती डूबते.आतप वेदना दृश्य डरावनावीभत्स भयानक भू का कोनाबहती है कातर सी नयनाकहर बाढ़ का छीना हंसना.मनुज आसरा बह रहा हैनिर्वाह सहज ही ढह रहा हैसर्वत्र ये पीड़ा कह रहा हैकर्त्तव्य किसका कम रहा है.कर्म साधना हो गई है क्षीणसामर्थ्य हीन साधन विहीनदिन मुश्किल के रातें मलीनदूर कब होगा गम ये असीम.भारती दास ✍️
https://vinbharti.blogspot.com/2020/08/blog-post_20.html
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सतीनाम स्तुति
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साकेत नगर में द्वार-द्वार पर
मुग्ध खड़े भगवान
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
राजा दशरथ थे बड़भागी
माता कौशल्या के पुण्य जागी
जन्म लिये रघुवर हरने को
दुख धरती के तमाम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
स्वप्न मनोहर पूर्ण हो आया
रामनिकेत क्षण क्षण मुस्काया
आनंद मोद है मगन लोग है
मन विभोर अभिराम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
शंखध्वनि का स्वर गूंजित है
राम राम मुख से वर्णित है
रूप मोहिनी पाप मोचनी
हंसी अधर पे ललाम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
जय-जयकार करे रघुराई
चरण कमल में शीश नवाई
भक्त संत मुनि के आराधक
हे निर्बल के राम
हर्षित मुदित वीर हनुमान....
भारती दास ✍️
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