छम-छम बरसती वर्षा रानी
उजली सी बूंदें लगती सुहानी....
खुशी है कहीं पर, कहीं पर हँसी है
कहीं आपदा बनकर बरसी है
सुख-दुःख जैसा ही उसकी कहानी
छम-छम बरसती वर्षा रानी....
सरिता की धारा मद में बहती
प्रलय स्वरुप बन नद में मिलती
तरल-गरल बन आती श्रावणी
छम-छम बरसती वर्षा रानी....
चपला चमकती चूमती नभ को
कौन-कहाँ पर प्राणी कब हो
क्षण में ही ज्वाला बनती दामिनी
छम-छम बरसती वर्षा रानी....
सांध्य की सुंदर सी घनमाला
रमणीय लगती प्रकृति-बाला
मन अनुरागिनी वयस सयानी
छम-छम बरसती वर्षा रानी....
भारती दास ✍️
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