Sunday, 26 July 2026

स्मृति में आये कलाम

 स्मृति के झरोखे से छनकर

अश्रुपूर्ण कुछ यादें आई

नहीं रहे भारत के रत्न 

शोक सन्देश थी सबने पाई।

राष्ट्रपति थे देश के वो पर

थे विनीत वे अति उदार 

ज्ञान-क्रांति के बने प्रवर्तक 

राष्ट्र के स्वप्न किये साकार।

अनुभवी थे तेजस्वी थे 

रखते थे सुन्दर विचार 

कर्म ही उनका ध्येय रहा था 

अंतिम-क्षण तक न माने हार।

पृथ्वी-अग्नि-ब्रम्होस मिसाइल 

अंतरिक्ष में थी उनकी ये देन

था शानदार व्यक्तित्व उनका 

कहलाते थे वे मिसाइल मैन।

सारी समस्याओं की जड़ है 

अज्ञानी और निर्धन होना 

इससे छुटकारा पाने को 

जन-जन को संकल्प है करना।

ह्रदय की सत्यता शांति देती 

सद्भाव सिखाता है व्यवहार 

कठोर परिश्रम चरित्र बनाता

प्रेम बसाता है परिवार।

भ्रष्टाचार-मुक्त हो जीवन

दूसरों के लिए बने मिशाल

प्रेरणा-भरी ये उनकी बातें 

बेशक बन गयी है बेमिशाल।

इस्लामी मजहब था उनका 

पढ़ते थे वे पाक कुरान

मानवता ही धर्म थी उनकी 

कर्म बना उनकी पहचान।

चाहत यही रही थी उनकी 

हो धरती का अनुपम सृजन 

सच्ची श्रद्धांजलि होगी उनकी 

अपनाये सब उनका चिंतन।

भारती दास ✍️           

    

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