Monday, 28 October 2013

श्रद्धांजली

                
                                                                
             

हंस सवारी करते चले
ज्ञान सरोवर बनते चले
 सरस्वती के मानस पुत्र
 साहित्य के अनमोल अनंत
‘’एक इंच मुस्कान’’ को ओढ़े
‘’सारा आकाश’’ में उड़  चले
शोक  मनाये  देश  का मन
साहित्य का उजड़ा  है चमन
भारती दास ✍️ 

2 comments:

  1. आपने जिस तरह साहित्यिक विरासत और एक बड़े व्यक्तित्व के जाने का दर्द दिखाया है, वो दिल तक पहुँच जाता है। मैं हर शब्द में सम्मान और एक गहरी कमी महसूस करता हूँ। “एक इंच मुस्कान” और “सारा आकाश” वाली बात तो सीधे उनके व्यक्तित्व की झलक दे देती है।

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