Monday, 24 November 2025

जहाँ धर्म है वहीं विजय है

थी धर्मपरायण पुण्यात्मा नारी

दुर्योधन-जननी माता गाँधारी

उनकी वचन मिथ्या नहीं जाती 

सच हो जाता जो वह कहती 

माँ के पास सुयोधन आता 

विजय प्राप्ति का आशीष माँगता

एक ही उत्तर वो प्रतिदिन देती

जहाँ धर्म की पूजा होती 

वहीं पर जय है वहीं विजय है 

वहाँ ना कोई छल और भय है 

जो धर्म की रक्षा करता है 

वही विजयी कहलाता है 

हठ विप्लव की वृष्टि करता 

विनाश कर्म की पुष्टि करता 

सुयोधन का आक्रोश देखकर

डरती थी मन में आठों पहर 

मौन चुप हो जाती गाँधारी

व्यथा भार सहती लाचारी 

उत्थान-पतन नियति करती है 

अवलंबन भी छीन लेती है

शक्ति पूँज मन सहा आघात 

चाहे उजड़ा सारा साम्राज्य 

समस्त पुत्रों का हो गया अंत

छोड़ ना पाई धर्म का पंथ

मातृवत प्रेम में भीगी दृष्टि 

थी वो प्रवित्र पावन सी मूर्ति 

पाँडव धर्म के साथ चले 

सतत् विजय उनको मिले।

भारती दास ✍️

Saturday, 8 November 2025

मुझे गर्व है मैं हूंँ बिहारी

 मुझे गर्व है मैं हूँ बिहारी 

माँ ब्राह्मी की मैं हूँ पुजारी ....

जिस मिट्टी में पली बढ़ी थी 

सेवा-त्याग-अनुराग भरी थी 

थी रामप्रिया वो सियादुलारी 

मुझे गर्व है मैं हूँ बिहारी....

मैथिल कोकिल थे विद्यापति 

किये असाध्य थे शंकर की भक्ति 

बने थे सेवक उनकी पुरारी

मुझे गर्व है मैं हूँ बिहारी....

ओजस्वी कवि दिनकर जी थे 

विद्रोही क्रांति के स्वर थे

राष्ट्रप्रेम थी उनकी प्यारी 

मुझे गर्व है मैं हूँ बिहारी....

वीर कुँवर सिंह थे स्वाभिमानी 

जख्मी भुजा काटे थे अपनी 

देशभक्ति उनकी थी न्यारी 

मुझे गर्व है मैं हूँ बिहारी....

बातों में आ जाती हूँ मैं 

धोखा भी खा जाती हूँ मैं 

मीठे वचन पर जाती हूँ मारी

मुझे गर्व है मैं हूँ बिहारी....

भारती दास ✍️

Saturday, 1 November 2025

हे दीनबंधु नरायणम्


सरोज नयनम् शेष शयनम्

घनाभ तन हे जनार्दन 

कर शंख चक्र सुशोभितम्

हे दीनबंधु नारायणम्।

जय पद्मनाभम् लक्ष्मीकांतम्

श्री हरि जय विश्वेम्भरम्

हे सत्यरूपम् शान्ताकारम्

गरूड़ासनम् जगदीश्वरम्।

जय चतुर्भुजाय सुधाप्रदाय

 हे वृंदाप्रियम् परमेश्वरम्

हे महाबलाय सुलोचनाय

जय प्राणदाय पुरातनम् ।

जय वामनाय त्रिपदाय

जय सर्वनाथम् मंगलायम्

हे गगन सदृश्यम् विराट पुरुषम्

श्री विभु जय सनातनम्।

हे अनंत रुपम् हे सुरेशम्

अरुणाधरम्  हे मनोहरम्

असुरमर्दनम्  जगत वंदनम्

नमामि सिन्धु सुता वरम् ।

भारती दास ✍️