यह जीवन एक कल्पवृक्ष है
जो दुर्लभ रुप से मिलते हैं
"ईश्वर अंश जीव अविनाशी"
ऋषि मुनि भी कहते हैं.
अद्वितीय सी कृति ब्रह्म की
अद्भुत कार्य सब करते हैं
लक्ष्य अगर ना हो जीने का
पशुवत जीवन जीते हैं.
सबसे अलग विशिष्ट बनाते
उपलब्धि वो पाते हैं
बहुमूल्य सा हर एक पल को
उम्मीद बना हर्षाते हैं.
आत्मदेवता की अराधना
जो निर्मल मन से करते हैं
स्वस्थ चिंतन-मनन की शक्ति
उनमें सहज ही रहते हैं.
मात्र स्वार्थ वृत्ति के कारण
वो दानव कहलाते हैं
अहंकार का साधन बनकर
चैन कभी ना पाते हैं.
अनंत देव हैं सर्वश्रेष्ठ है
निरोगी काया का उपहार
भगवान सदा ही खुश होते हैं
बरसाते उनपर उपकार.
भारती दास ✍️