Wednesday, 9 June 2021

ऐसे देवतरू को प्रणाम


छाया जिनकी शीतल सुखकर

मोहक छांव ललाम

ऐसे देवतरु को प्रणाम

खगकुल सारे नीड़ बनाते

पशु पाते विश्राम

ऐसे देवतरु को प्रणाम.....

ब्रह्मा शंकर हरि विराजे

साधक जहां पर मन को साधे

सच्चे निर्मल सुंदर चित्त से

पूजते लोग तमाम

ऐसे देवतरु को प्रणाम....

सुहाग सदा ही रहे सलामत

हो आंचल में हर्ष यथावत

पुष्प दीप प्रसाद चढ़ाकर

गाते मंगल गान

ऐसे देवतरु को प्रणाम....

सत्यवान को प्राण मिला था

नव जीवन वरदान मिला था

अक्षय सौभाग्य जहां पर पाई

नारी श्रेष्ठ महान

ऐसे देवतरु को प्रणाम

भारती दास ✍️


वट सावित्री पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

 


18 comments:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार( 11-06-2021) को "उजाले के लिए रातों में, नन्हा दीप जलता है।।" (चर्चा अंक- 4092) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद मीना जी

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  2. सुन्दर रचना!

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  3. छाया जिनकी शीतल सुखकर

    मोहक छांव ललाम

    ऐसे देवतरु को प्रणाम

    खगकुल सारे नीड़ बनाते

    पशु पाते विश्राम

    ऐसे देवतरु को प्रणाम.....

    भावों की सुंदर अभिव्यक्ति,तरुवर का महत्व समझाती लाजबाब सृजन ,सादर नमन आपको

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  4. गहन और सार्थक लेखन...।

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  5. समसामयिक तथा वृक्ष देवता को मन में उतरती सुंदर रचना ।

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    1. धन्यवाद जिज्ञासा जी

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  6. वटवृक्ष की पूजा एक प्रतीक है प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता को व्यक्त करने का। स्त्रियों द्वारा इसकी पूजा करने का मनोवैज्ञानिक कारण भी है कि वटवृक्ष विशाल है उसी तरह उनका वंशवृक्ष भी फूले फले और विशाल हो। बाकी धार्मिक महत्त्व तो है ही। बहुत सुंदर रचना इस पवित्र वृक्ष की महत्ता को स्पष्ट करती हुई।

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  7. छाया जिनकी शीतल सुखकर

    मोहक छांव ललाम

    ऐसे देवतरु को प्रणाम

    खगकुल सारे नीड़ बनाते

    पशु पाते विश्राम

    ऐसे देवतरु को प्रणाम.....

    वटवृक्ष की महिमा एवं महत्ता बयां करती बहुत ही सुन्दर लाजवाब कृति...
    वाह!!!

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  8. धन्यवाद सुधा जी

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  9. बहुत सुंदर रचना

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  10. धन्यवाद अनुराधा जी

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  11. इसी बहाने प्रकृति से जुड़ना होता है लोगों का
    बहुत सुन्दर

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  12. धन्यवाद कविता जी

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