Friday, 15 August 2014

जीवन में उतरेंगे कृष्ण



गोकुल में जन्में थे कृष्ण
मथुरा में पले थे कृष्ण
धर्म के रथपर कर्म के पथपर
चलते चले थे वो जीवनभर
उनके वचन गीता कहलाये
पावन इतनी कि कसमें खाये
युद्ध में भी सामर्थ्य दिखाये
धर्म-अधर्म का अर्थ बताये
चैन की वो वंशी भी बजाये
जीवन क्या है ये समझाये
उनसे जुड़ी थी जो भी चीज
अमूल्य हो गया है वो प्रतीक
कृष्ण प्रेम से मुँह ना मोड़े
पुरुष बने पुरुषार्थ ना छोड़े
भोगी बनकर धर्म ना छोड़े
योगी बनकर कर्म ना छोड़े
जबतक है जीवन के क्षण
बढे सार्थक सही कदम
जीवन में उतरेंगे कृष्ण
घन बनकर बरसेंगे कृष्ण .


                     HAPPY JANMASHTAMI.             

   

Friday, 8 August 2014

राखी के वचन महान



राखी के हैं वचन महान
मिल के बचायें इसकी आन
रिश्तों का सौन्दर्य ना टूटे
प्यार का माधुर्य ना छूटे
होठों पर छाये मुस्कान ..
विश्वास भरी टूटे ना डोरी
ये कोमल रेशम की डोरी
इक-दूजे पर हो अभिमान ..
दुनिया विरुद्ध हो जाये सारी
निः स्वार्थ निभाए जिम्मेदारी
इसकी पावन है पहचान ..
हो जाये कितनी भी गलती
है भाई-बहन से इतनी विनती
                      क्षमा करे देकर स्नेह-दान.    

Monday, 28 July 2014

हो मुबारक ईद की शाम


करें कुबूल दुआ सलाम

हो मुबारक ईद की शाम......

मीठी सेवइयां ढेरों मिठाइयां

भर जाये जीवन में खुशियां  

मिट जाये सब मैल तमाम

हो मुबारक ईद की शाम .....  

प्रेम से बढ़कर धर्म नहीं है

धर्म पे होता अधर्म यहीं है

सब धर्मों में एक पैगाम

हो मुबारक ईद की शाम ......

एक ही जग के होते स्रष्टा

एक ही जग के होते हन्ता

उनको पुकारें किसी भी नाम

हो मुबारक ईद की शाम .......

हर मजहब में चाँद है सुन्दर

दिन को राह दिखाते दिनकर

देती सितारें जगमग शाम

    हो मुबारक ईद की शाम ........ .


Friday, 18 July 2014

गृहस्थ जीवन है तपोवन


महर्षियों का श्रेष्ठ वचन

गृहस्थ जीवन है तपोवन


भारतीय संस्कृति की शान


रिश्ते नातों का सम्मान


शादी होती बनता परिवार


जिम्मेदारियों का बड़ा पहाड़


एक दूजे का सम व्यवहार


कुशल आदतें गुण संस्कार


चिंता चिंतन और सहयोग


सांसारिक सुख का उपयोग


जहाँ छीनता सुख अधिकार


वो कहाँ होता है परिवार


नारी संवेदना का है रूप


स्नेह भावना का प्रतिरूप


वो चाहे तो घर हो सुन्दर


वो चाहे तो घर हो जर्जर


विधि ने गुण देकर कुछ खास


बसा दिया नारी में सुवास


कल्पना में रंग भरकर


अरमानों को संग लेकर


हरपल आगे बढती जाती


जीवन पथ को सुखद बनाती


सेवा संयम धैर्य अपनाती


गृहस्थ जीवन सफल बनाती


अपनापन कभी न छोड़ती


स्वाभिमान से मुँह न मोड़ती


इक-दूजे में स्नेह जगाती 


प्यार-विश्वास-आश से जीती


राजा जनक का सुन्दर गेह


कहलाते थे वे विदेह


गृहस्थ जीवन में ही रहकर


काम किये योगी सा बनकर


जप-तप-पूजा साधना ध्यान


मन के अन्दर ही है ज्ञान


क्यों भटके जंगल और धाम


उर में बसते है भगवान


सुन्दर घर संसार जो होता


नर नारी दोनों से बनता


थोड़ा संयम रखना होता  


थोड़ा थोड़ा तपना होता  


सुखमय होगा सबका संसार  

क्यों बिखरेगा कोई परिवार