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Thursday, 23 February 2017

हे भूतेश्वर हे दिगंबर



हे भूतेश्वर हे दिगंबर
तुम सर्वव्यापी नाथ शंकर
सांसों में साकार बसकर
प्राणों में आधार बनकर
करुणा के आगार होकर
दुष्टों को संहार कर-हर
जन पे कर उपकार विषधर
तुम रहो न हास्य बनकर
कर दया अब भक्त-जन पर
नेत्र खोलो हे ज्ञानेश्वर
ये है अवसर हे महेश्वर
देव आओ स्वर्ग तजकर.
HAPPY MAHASHIV RATRI

Sunday, 5 February 2017

शुष्क सुमन की इस दशा पर



जब था शैशव रूप सुमन का
पवन अंक में भर लेता था
मंजुल सुकोमल नवल गात पर
झूम झूम कर मुख छूता था.
मधुप-गण का मनुहार दुलार
मन को चंचल कर देता था
अंतर में आनंद बहाकर
दृग में नवीन खुमार भरता था.
चन्द्र की किरणें स्नेह लुटाकर
रजनी को लोरी सुनाती थी
सुन्दर छवि को देख-देख कर
पल-पल खुश हो मुस्काती थी.
लेकिन ये क्या हाय विधाता
बिखर गए मादक श्रृंगार
मोहक छवि का अंत हो गया
स्वार्थी बना वही संसार.
गंध में अब अनुराग नहीं है
चाह भ्रमर का बुझ सा गया है
चन्द्र किरण ना लोरी सुनाती
मुख-मंजू मुरझा सा गया है.
जिसको पवन लेकर अंकों में
प्यार किया था होकर लीन
जो सबके उर को भाया था
आज भूमि पर हुआ मलीन.
शुष्क सुमन की इस दशा पर
कभी नहीं कोई रोता है
अंत का ये कुदृष सदा ही
सबके जीवन में आता है.  

Tuesday, 31 January 2017

आया वही मधुमय बसंत



सदमय बसंत मदमय बसंत
आया वही मधुमय बसंत
पेड़ों पर पत्ते डोलते
नव गात से मन मोहते
उर में उमंगें है भरे
तनमन ख़ुशी से झूमते,
नवमय बसंत मुदमय बसंत
आया वही मधुमय बसंत….
ऋतुराज की आई बहार
प्रफुलित हुई फूलों की डार
सुर-सुंदरी ने की श्रृंगार
झंकृत हुए वीणा के तार,
सुरमय बसंत शुभमय बसंत….
आया वही मधुमय बसंत.
खग की मधुर कलरव की शोर
कितनी सुहानी है ये भोर
बहके कदम मेरी किसकी ओर
खींचे कोई मेरे मन की डोर
रसमय बसंत सुखमय बसंत
आया वही मधुमय बसंत…..         

Wednesday, 25 January 2017

देश को रहा गर्व है



इतिहास के अध्याय में
क्रांति वीर से ही शान है
स्वार्थ लोलुप सभ्यता से
रो उठा अभिमान है.
माताएं मौन थी विवश
दीनता की बोध से    
तार-तार थे ह्रदय
क्रूरता की क्षोभ से.
भयभीत भूमि क्षुब्ध थी
धधक रहा गगन था
आंचल से रक्त पोंछकर
अश्रु पूरित नयन था.
देश की उस आन पर
जिसने चढ़ाया लाल था
कोख सूनी हो गयी थी
सिंदूर विहीन कपाल था.
नयी-नयी उलझनों से
रोया ना पछताया था
निज बुद्धि के प्रदीप से
आगे बढ़ वो आया था.
आज कोई भूल से
आदर्श बन आये जो
लेकर स्वरुप राम का
अन्याय फिर मिटाये जो.
नीति ज्ञान से सदा ही
रहा कर्म श्रेष्ठ है
उन शूरवीर पुत्र पर
देश को रहा गर्व है.