है महीनों से उत्साहित हरदम
निर्मल-पावन चंचल ये मन
बरसों बाद ये मौका आया
राखी का पर्व अनोखा आया
आनंद मगन है उर-अंतर्मन
है महीनों से उत्साहित हरदम....।
शैशव जैसा है उल्लास
स्नेही भाई भी है खास
सुख हो दुःख या हो कोई क्षण
है महीनों से उत्साहित हरदम....।
भगवान रुद्र हरे सब व्यथा
हो प्राप्त धन-यश सर्वदा
सत्य-सरल सुखमय हो जीवन
है महीनों से उत्साहित हरदम....।
प्रेम-सौहार्द का उन्मेष रहे
आशीष सदा ही विशेष रहे
हो सुंदर मंगलमय हर-पल
है महीनों से उत्साहित हरदम....।
भारती दास ✍️
सुन्दर
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteबहुत सुंदर , रक्षाबंधन की। स्नेहशील बधाई !
ReplyDeleteधन्यवाद प्रिया जी
Deleteरक्षा बन्धन पर सुंदर सृजन
ReplyDeleteधन्यवाद अनीता जी
Deleteबहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteबहुत सुंदर रचना । रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ
ReplyDeleteधन्यवाद शुभा जी
Deleteरक्षा के बंधन की सुन्दर पंक्तियाँ ... बहुत बधाई इस पावन त्यौहार की ...
ReplyDeleteधन्यवाद सर
ReplyDeleteउत्तम लेखन
ReplyDeleteधन्यवाद सर
ReplyDeleteहर लाइन में जो उत्साह और मासूम उल्लास झलक रहा है, वो सीधे दिल तक पहुँचता है। भाई-बहन के प्यार को इतना सजीव और सहज अंदाज़ में व्यक्त करना कमाल है। मुझे ये हिस्सा सबसे ज़्यादा पसंद आया, “सुख हो दुःख या हो कोई क्षण, है महीनों से उत्साहित हरदम।” सच में ये भाव बताता है कि रिश्तों में छोटी-छोटी खुशियाँ कितनी बड़ी अहमियत रखती हैं।
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