Monday, 10 November 2014

नारी बिना साहित्य अधूरा



नारी कविता की पंक्ति है
चिंतन-मनन की अभिव्यक्ति है
उससे प्रेरित ये सृष्टि है
हर देवी की वो शक्ति है
संवेदना की वो मूर्ति है
भावना में वो बहती है
संस्कृति को सिंचित करती है
दर्दभरी पंक्ति लिखती है
समाज की दुखभरी विवशता
कई विषय को उसने समझा
हुई प्रतारित खुद को झोंका
हर विरोध को उसने रोका
घूंट अनेकों पीकर कड़वा
देती रही हर-पल परीक्षा
मूक समर्पण की थी भाषा
घूटनभरी थी ज्ञान पिपासा
मूर्छित शोषित थी अभिलाषा
ख्वाब भरी थी नन्ही आशा
वैदिक युग की जो थी नारी
अपने चितन से युग को संवारी
लेखनी में करके भागीदारी
साहित्य में अपनी पैर पसारी
काव्य फलक की थी ध्रुवतारा
नाम था उनका बाई मीरा
काव्य सृजन की बहती धारा
प्रखर प्रेरणा की अवतारा
अनगिनत है ऐसी विदुषी
साहित्य में उभरी है मनीषी
एक से बढ़कर एक विभूति
जिसने भरी सुन्दर अनुभूति
सौन्दर्य अभिलाषी कालिदास
तुलसी जायसी और प्रसाद
सबने माना नारी को खास
नारी है गरिमा की सुबास
कल्पना में भरकर उड़ान
नये रूप में लेकर पहचान
साहित्य के नभ में छाई है
अपनी ध्वजा लहराई है
शिक्षा का आलोक जो बिखरा
ज्ञानभरी राहों से गुजरा
रौशन हुआ उर का अँधेरा
                    नारी बिना साहित्य अधूरा.                    

Friday, 31 October 2014

यौवन



मदिरा सी मदमस्त ये यौवन  
अलसाई अलमस्त ये यौवन
होता स्वच्छंद उन्मुक्त ये यौवन
चिंता-फिकर से मुक्त ये यौवन
सुन्दर सुखद अवस्था यौवन
खुशियों से दमकता यौवन
प्रचंड उर्जा से सज्जित यौवन
या आवेग से विचलित यौवन
भोगवृति की लालसा यौवन
या योगी-यति का श्रेष्ठ सा यौवन
समाज राष्ट्र का सपना  यौवन
या दुखद विडंबना यौवन
नव सृजन का कल्पना यौवन
या दुश्वृति का वर्जना यौवन
संस्कारित साधना सा यौवन
या कुवृति का वासना यौवन
बुढ़ापे का पालना है यौवन
या जर्जर सा कामना यौवन
जीवन की उपयुक्त समझ
यौवन सिखलाती है समस्त
भारत का सफलतम यौवन
बना कुशल मार्गदर्शक यौवन
ईश-प्रदत अनुपम उपहार
            क्यों  करे कोई बर्बाद बेकार .         

Wednesday, 22 October 2014

आलोक बिखरे उजास की



आलोक हो आभास की
तमस में उजास की
स्नेह युक्त आश की
सुखमय सुबास की .
आलोक हो स्वच्छंद की
मन की उमंग की
ह्रदय की तरंग की
सुरभित सुगंध की .
आलोक हो उत्साह की
शक्तियां प्रवाह की
अश्रु न हो आह की
विकृति ना हो चाह की .
आलोक हो सम्मान की
भाव हो कल्याण की
अपनी स्वाभिमान की
चिंतन और ज्ञान की .
आलोक हो विश्वास की
बोध और एहसास की
स्मित और सुहास की
आनंदमय प्रकाश की .
भारती दास ✍️ 
 
दिवाली की हार्दिक शुभकामना