Saturday, 2 November 2013

प्रकाश पर्व





स्व-अवलोकन करके बताएं
फिर हम अपना पर्व मनाएं
संस्कृति का ये दीप सुनहरा
यत्र - तत्र - सर्वत्र  जलाएं
ये दीपक की बद्ध कतार
है सुन्दर अपना उपहार
अंधकार को परे हटाकर
आलोकित करते घर –द्वार
विघ्न –विनाशक गणपति पूजन
विष्णु प्रिया लक्ष्मी का अर्चन
मनवांछित वर हमें मिले
जन करते कर –जोड़ निवेदन
आलोक उमंग उल्लास का पर्व
आस्था श्रद्धा विश्वास का पर्व
सद-चिंतन स्वाभिमान के संग
सहर्ष मनाएं प्रकाश का पर्व.

दिवाली की शुभ संध्या पर,हार्दिक शुभकामना.

Monday, 28 October 2013

श्रद्धांजली

                
                                                                
             

हंस सवारी करते चले
ज्ञान सरोवर बनते चले
 सरस्वती के मानस पुत्र
 साहित्य के अनमोल अनंत
‘’एक इंच मुस्कान’’ को ओढ़े
‘’सारा आकाश’’ में उड़  चले
शोक  मनाये  देश  का मन
साहित्य का उजड़ा  है चमन
भारती दास ✍️ 

Wednesday, 16 October 2013

तारे बनकर मुस्कायेंगे


मेरे पिताजी नहीं रहे
दुनिया छोड़ चले गए
चिर-निद्रा में होकर लीन
पंचतत्व में हुए विलीन
उनकी याद बसी हर –कण में
संस्कार देकर जीवन में
उन्होंने ने जो की उपकार
सुखद बना घर व परिवार
पितर बने वो पथ-प्रदर्शक
बने दयालु सदा सहायक
संवेदनाओं की गूंज बने
दया –स्नेह की पुंज बने
सौहार्द –भावना है अपार
हर –पल दे सुन्दर विचार
भाव मन की जूड़ी रहे
अनुकम्पा उनकी बनी रहे
सच ही किसी ने कहा- यहाँ है
जाने वाले फिर मिले कहाँ  है
वापस कभी नहीं आयेंगे
तारे बन कर  मुस्कायेंगे।
भारती दास ✍️ 

Friday, 13 September 2013

हिन्दी –दिवस




मैं बस इतना कहना चाहती
हिंदी है मेरे राष्ट्र की भाषा
संविधान ने उसे बनाया
देश और जन –जन की भाषा
मन के अन्दर होती पीड़ा
टूटती है जब दिल की आशा
सहना पड़ता घात हमें 
झेलनी पड़ती है निराशा 
मेघ ही सींचते है सदा
धरती का हर कोना
रंग – रूप कई है फिर भी
है हिन्दुस्तानी सभी ना
अंग्रेजी को गले लगाकर
बेच दिये अपना संस्कार
बलिदानी ने खून बहाया
भूल गए उनका उपकार
संस्कृति की पहचान है हिन्दी
मानवता की शान है हिन्दी
नक़ल करें हम क्यूँ गैरों का
भारत का अभिमान है हिन्दी
अपने घर की बेटी को
थोड़ा सा अपनाना
हरदिन बोलो अंग्रेजी
आज हिन्दी दिवस मनाना ।
भारती दास ✍️