Thursday, 24 September 2026

समय को उपेक्षा पसंद नहीं होता


भारत की पुरातन गरिमा से एक ही तथ्य उजागर होता है कि साधु-संत,ब्राह्मणों और पुरोहितों का वर्ग न्यूनतम निर्वाह में अपना काम चलाते रहे तथा शेष समय में लोकमंगल की सामयिक आवश्यकताओं को पूरा करने में लगे रहेउनकी सेवा साधना ने जन-जन का मन जीतने में कामयाब रहा, इसीलिए लोगों ने उनकी परामर्श को अपने जीवन में उतारने को अपना ध्येय समझा और सर्वतोमुखी प्रगति का वातावरण बनते गया।

              उपनिषद कहता है कि क्षण में शाश्वत छिपा है और अनु में विराट समाया है, जो क्षण को पहचान लेता है वही सत्य को जान पाता है जिसने भी क्षण को तिरस्कार किया उसने विराट की व्यापकता को ही खो दिया।

जीवन का प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण है। किसी भी क्षण का मूल्य किसी दूसरे क्षण से न तो ज्यादा है और न ही कम।इस बात को वो जानते हैं जो प्रत्येक क्षण को आनंदमय बना लेते हैं। अच्छे समय की प्रतीक्षा करना व्यर्थ है।

               संसार में सफल वही है जिसे समय का सदुपयोग करना आता है। जब हम समय से अपने कार्यों को पूरा करते हैं तब कार्यों में होने वाले सफलता के बारे में सोचते हैं तो मन को भी संतुष्टि मिलती है। हमारी कार्यकुशलता, बौद्धिक क्षमता और भावनात्मक क्षमता का भी जीवन में मह्त्त्वपूर्ण भूमिका है। किसी कार्य को करने में कितना समय लगता है इसकी भी समझ विकसित होती है।कभी-कभी नासमझी के कारण अधिक समय लग जाता है।

        समय ही जीवन की परिभाषा है क्योंकि समय से ही जीवन बनता है। अतःसमय का सदुपयोग करना जीवन का उपयोग करना है,समय का दुरपयोग करना जीवन को नष्ट करना है।समय किसी की भी प्रतीक्षा नहीं करता। वह प्रतिक्षण,मिनट ,घंटे ,दिन, महीने व वर्षों के रूप में निरंतर विलीन होता रहता है। एक बार हाथ से निकला जो समय वो फिर कभी वापस नहीं आता। काल का नियम है निरंतर बहते रहना।

  अस्त-व्यस्त जीवनशैली और व्यर्थ सी आदतें बहुमूल्य अवसरों को गँवा देते हैं जिससे अत्यंत ही जटिल समस्याएं पैदा हो जाती है। आसानी और सरलता से होनेवाले कार्य भी उलझकर रह जाता है। समय के सदुपयोग में ही जीवन की सार्थकता है। समय का पालन करना बहुत बड़ा गुण है।नियत समय पर निर्धारित काम करने की आदत ही शरीर और मन को संतुलन बनाये रखती है। वही व्यक्ति जीवन में सफल हुए हैं जिन्होंने समय की कीमत पहचानी है। सफलता के अवसर सभी के जीवन में आते हैं परन्तु समय का भी अनुकूल होना आवश्यक है। समय से हर कार्य हो तो अच्छे लगते हैं। जो व्यक्ति समय बरबाद करता है वही बाद में पछताता है और वक्त के थपेड़े खाता है।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है -

     ‘’ का वर्षा जब कृषि सुखाने

        समय चूकि पुनि का पछिताने

इन दिनों ऐसा समय है जिसमे एक पैर उत्थान की ओर और दूसरा पतन की नाव पर लोग रखते हैं। जीवन लक्ष्य से दूर होता जा रहा है। वर्तमान के समय का महत्त्व एवम् प्रभाव बहुत अधिक  है क्योंकि यही क्षण हमारे पास होता है। सदुपयोग या दुर्पयोग वर्तमान पल में ही संभव है। जो व्यक्ति वर्तमान क्षण में खड़े रहकर कुछ पाने का साहस रखता है, वही विरले जैसा होता है और सार्थक उपलब्धि हासिल करता है। वर्तमान ही भविष्य को आधार प्रदान करता है, जब यही क्षण दूर हो जाता है तो वही अतीत का कालखंड बन जाता है। अवसर चूक न जाये इसीलिए वर्तमान पल का सार्थक और समुचित उपयोग करना बेहद जरुरी है क्योंकि समय को अपनी अवहेलना बिल्कुल पसंद नहीं है।

        टिक-टिक-टिक घड़ी जो चलती

           हरपल कुछ पैगाम वो देती

          कर्म करो सब करो ना आलस

           टूट चूके तो कर लो साहस

           बीती पल ना आती वापस

           रूठो चाहे मनाओ हँस-हँस

           समय की बात न मानोगे

          कदम-कदम पर पछताओगे।

भारती दास ✍️                                                                      

No comments:

Post a Comment