Wednesday, 21 October 2015

विजय का महापर्व



सर्वजन हित के लिए
सर्वजन सुख के लिए
चौदह वर्ष राम तपे थे
असंख्य घोर वे कष्ट सहे थे
संवेदना भरी उनकी सजलता
पूर्ण साधना की प्रखरता
थी चेतना में प्रबलता
लक्ष्य में उनकी छिपी पूर्णता
क्षमा-दया-श्रद्धा-मर्यादा
जप-तप-ध्यान-दान व नम्रता
दस विद्या से शोभित थी क्षमता
धर्मयुद्ध में साथ थी माता
नत मस्तक हुए थे राम
विजय का उनको मिला वरदान.
परम तपस्वी था वो रावण
तोड़ दिया सारा अनुशासन
शिव शक्ति के वो था भक्त
बना दुराचारी हरवक्त
आतंकी व्याभिचारी बना था
मर्यादा सब छोड़ चला था
अनीति-अत्याचार-आतंक
ये सदा देते हैं डंक
आदिशक्ति ने दिया वरदान
रावण तेरा हो कल्याण
लंका बनी भूमि श्मशान
दर्प मिटा और मिटा अभिमान
राम की विजय रावण का पराभव
विजयी पर्व है दोनों का अनुभव
ये महापर्व देता है सीख
होती सदा ही न्याय की जीत.  
भारती दास ✍️     
. HAPPY VIJYADASHMI      

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