सर्वजन हित के लिए
सर्वजन सुख के
लिए
चौदह वर्ष राम
तपे थे
असंख्य घोर वे
कष्ट सहे थे
संवेदना भरी उनकी
सजलता
पूर्ण साधना की
प्रखरता
थी चेतना में
प्रबलता
लक्ष्य में उनकी
छिपी पूर्णता
क्षमा-दया-श्रद्धा-मर्यादा
जप-तप-ध्यान-दान
व नम्रता
दस विद्या से
शोभित थी क्षमता
धर्मयुद्ध में
साथ थी माता
नत मस्तक हुए थे
राम
विजय का उनको
मिला वरदान.
परम तपस्वी था वो
रावण
तोड़ दिया सारा अनुशासन
शिव शक्ति के वो
था भक्त
बना दुराचारी
हरवक्त
आतंकी व्याभिचारी
बना था
मर्यादा सब छोड़
चला था
अनीति-अत्याचार-आतंक
ये सदा देते हैं
डंक
आदिशक्ति ने दिया
वरदान
रावण तेरा हो
कल्याण
लंका बनी भूमि
श्मशान
दर्प मिटा और
मिटा अभिमान
राम की विजय रावण
का पराभव
विजयी पर्व है
दोनों का अनुभव
ये महापर्व देता
है सीख
होती सदा ही
न्याय की जीत.
भारती दास ✍️
. HAPPY VIJYADASHMI
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