Google+ Followers

Friday, 4 September 2015

मनमोहन मुरलीधर श्याम



गरज-गरज घन बरस रहा है
चमक-चमक जाती बिजली
जन्म लिए वसुदेव के नंदन
देवकी फिर आहें भर ली .
मेढक का टर-टर सा स्वर है
गिरती है बूंदों की लड़ी
यमुना की कातिल सी लहरें
काली रातें स्याह भरी .
कपटी कुटिल कंस के डर से
वसुदेव चले गोकुल की ओर
नीरव रजनी भयानक इतनी
टूट पड़े हिम्मत की डोर .
प्रभु के दर्शन पाकर यमुना
हर्षित होकर शांत हुई
थम गयी उन्माद सी लहरें
पाठ देकर आश्वस्त हुई .
लीलाधर की लीलाओं ने
सबके मन को मोह लिया
क्षण क्षण आती विपदाओं से
लड़ने का भी सोच लिया .
जीवन है कर्मों का संगम
ज्ञान में गीता सार दिया
मन के हर भावों में बसकर
सद्भावों का उपहार दिया .
पेम धुन वंसी में बजाकर
सौम्य रूप साकार किया
मुरलीधर के जनम का उत्सव
मन आनंद विभोर किया .