Wednesday, 18 March 2026

देवी वंदना

 

तुझे नमन करने को आते

जग के सारे भक्त-प्रवर

मुझ जैसा मलीन जड़बुद्धि

रहते खड़े ठगे से अक्सर,

तुझे नमन….

दुविधा में ही जीती आई

ज्योति किरण दिखाना माँ

घिरा है द्वन्द का ताना-बाना

मुझको राह दिखाना माँ

कुछ भी समझ नहीं आता है

जाऊँ कब किस ओर किधर,

मुझ जैसा….

दुनिया का तुम पीड़ा हरती

वेदना मेरी मिटाना माँ

पूजा का पलपल सुखमय हो

अपना हाथ बढ़ाना माँ

दोष रोष सब माफ़ करो तुम

लो ममता से हाथ पकड़,

मुझ जैसा….

कैसे करूँ प्रार्थना तेरी

क्या मांगू तुझसे वरदान

अंतर्यामी होकर फिर क्यों

माँ रहती हो तुम अनजान

नयन मूँदकर क्यों बैठी हो

डालो मुझपर एक नजर,

मुझ जैसा…..

मेरे बिगड़े काम बना दो

रोशन कर दो मेरा अंतर

मेरी भक्ति बनी रहे माँ

दिव्य चेतना दे दो भर-कर

मानवता की लाज बचा लो

तेरी महिमा अजर अमर,

मुझ जैसा…..

भारती दास ✍️


4 comments:

  1. बहुत सुंदर अम्बा माँ की कृपा हम सब पर बनी रहे माँ अंधेरों में प्रकाश की जगमग ज्योति सी छाती है ।

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    1. धन्यवाद प्रिया जी

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  2. भक्तिभाव में डूबी सुंदर रचना

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    1. धन्यवाद अनीता जी

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