Thursday, 31 July 2025

नष्ट हुई एकता

 

नष्ट हुई एकता

दूरियांँ बढ़ने लगी 

अपेक्षाओं के भार से 

समस्याएँ गढ़ने लगी ।

विश्वास टूटने लगा 

कलह का आरंभ हुआ 

स्वजन के विरोध से

 मतभेद का नाद हुआ ।

स्नेह कहाँ खो गयी

दंभ का विकार हुआ

सुखमय सी स्मृतियाँ

संदेह का आधार हुआ ।

होगा नहीं मिठास अब

रिश्तों में दरार हुआ 

सत्य हारता गया 

वेदना अपार हुआ ।

अपनों का आदर नहीं 

खराब संस्कार हुआ 

क्षमा माँगते बड़े 

छोटे का व्यवहार हुआ ।

व्यथा विषाद कराह से 

क्लेश का संचार हुआ 

मौन रहें अब सर्वदा 

समाधान स्वीकार हुआ ।

भारती दास ✍️

Thursday, 24 July 2025

मन की कुंठा है

 ऊँचे ऊँचे पर्वत पर भी 

सागर की गहराई में भी 

सारे देश में गूँज उठी है 

भारत की आत्मा हिन्दी है ।

आसामी-गुजराती-मराठी 

क्षेत्रीय भाषा सबको नही आती 

फिर भी रहते मिलकर साथी 

नहीं उठाते भाषा पर लाठी ।

एक ही धरती एक ही आह्वान 

था रूदन-क्रंदन एक समान 

देश हित पर बलिदान हुये थे

उत्सर्ग सबने प्राण किये थे ।

जिनके कार्यों से उन्नति आई 

प्रगति की परचम लहराई 

उनके साथ ही हुई हाथापाई 

संकट अनेकों जीवन में आई ।

हिंसा-हत्या करने का बहाना 

समर भूमि भारत को बनाना 

निर्दोषों को अपमानित करना 

मजदूरों को प्रताड़ित करना ।

राजनीति की यह गंदी प्रथा है 

भाषा विवाद मन की कुंठा है 

उपद्रवियों की अपराधी धंधा है 

विकास की राह में हिन्दी सदा है ।

भारती दास ✍️ 



Tuesday, 15 July 2025

मौना पंचमी

 

श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की

तिथि पंचमी का है महत्त्व विशेष

शिव की पुत्री मनसा देवी की

पूजा करते हैं लोग अनेक  ।

नाग देवता की उपासना 

पंद्रह दिनों का है ये अनुष्ठान 

मौन-स्थिर शांत-चित्त से 

करते हैं पूजा विधि-विधान  ।

फल-फूल संग कई मिठाईयाँ

मेंहदी चूड़ी श्रृंगार भी खास

नव विवाहित सभी स्त्रियाँ

उत्साह से करती है उपवास ।

आम के बीज और नींबू-नीम

इस दिन लोग चबाते हैं 

माना जाता है ये सब चीजें 

सर्प की दंश से बचाते हैं ।

मौना पंचमी के दिन से ही

नाग की रक्षा है शुभ काम

धैर्य-संयम जीवन में आये

मिलती है सीख अनंत ही ज्ञान ।

मिथिला की हो मधुश्रावणी 

या सावन की हरियाली तीज 

उमा-महेश की करके वंदना 

सुहागन लेती है आशीष ।

भारती दास ✍️