Google+ Followers

Friday, 6 December 2013

मौन की शक्ति



मौन की शक्ति गूढ़ अपार
जीवन शिक्षण के आधार
अंतर मन को मिलती शक्ति
महान कार्य की होती सिद्धि
मूक रवि के ढलने का स्वर
सब पशु –पक्षी आ जाते घर
निःशब्द रात का प्रणय-निवेदन
शशि- रश्मि का मौन समर्पण
प्यासी धरती की अकुलाहट
प्यास बुझाते बादल झट-पट
मौन ही मौन का है ये स्वर
कर्म का  रूप लेकर प्रखर
हर घटक के साथ लगाव
नहीं कोई बैर न कोई दुराव
चाणक्य का वो मौन संकल्प
जन्मा अतुल भारत अखंड
दीपक भी तो मौन ही रहता
अंधकार में राह दिखाता
पुष्पें भी तो रोज ही खिलता
बिना स्वार्थ के खूशबु देता
       अनंत काल से खड़ा हिमालय        
योगी-यति-मुनि का आलय
मौन ही रहकर सेवा करता
देह गला कर गंगा देता
प्रकृति का अनुपम ये प्यार
जीवों में करती संचार
अहंकार ना कोई आसक्ति
मौन है भक्ति मौन है शक्ति .