Monday, 16 February 2026

वही वसंत फिर से आया है

 शीत ऋतु की अनुभूति भी 

विकल ग्रीष्म का ताप प्रखर

प्राची की अरुणिम ऊषा सी

जीवन का अनमोल सफर।

नील व्योम की विशाल वक्ष सा

है अगाध विश्वास भरा मन

सहज सुभग अनुराग भरा 

है साँसो का कोमल स्पंदन।

इकतीस वर्ष के पावन संग का

अनगिनत ही एहसास लिए 

वही वसंत फिर से आया है 

उमंग अनंत उत्साह लिए।

भारती दास ✍️ 


1 comment:

  1. बहुत बहुत शुभकामनाएँ भारती जी!

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