प्रगति पथ के कर्मवीर को
कोई रोक नहीं सकता है
प्रयास रत वह हरदम रहता
श्रम को श्रम से जोड़ ही लेता।
कोई भी काम अचानक नहीं होता
संघर्ष निरंतर करना पड़ता
भ्रम प्रवंचना चलता रहता
अवसर को सौभाग्य बनाता।
उसी का मस्तक उज्जवल दिखता
विश्वास जिसका सुमंगल होता
आशा की आलोक दिखाकर
धैर्य शस्त्र रखने को कहता।
उद्यम करनेवाला ही तो
सुंदर राह पर चलता है
एक क्षण भी व्यर्थ न जाए
काम नेक करता रहता है।
श्रेय पथ पर चलकर ही
निज आत्मबल को बढ़ाता है
श्रेष्ठ व्यक्तित्व का स्वामी बनकर
सबके दिलों में बस जाता है।
माँ शारदे शक्ति सबल दे
उस व्यक्ति को मति विमल दे
सदय हृदय में शब्द विरल दे
सद्विचार सुंदर निश्छल दे।
भारती दास ✍️
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