Monday, 2 March 2026

होली आई

गाँव-गाँव शहर शहर 

मस्ती की धूम मचाता

जिस रंग से तन मन भीगा

वही होली फिर आ पहुँचा।

चिंतन के उस पावन रंग में

अपनी गरिमा भी आ सिमटा

विचारशील लोगों ने तो

होली को उन्माद ही समझा।

नैतिकता से बढ़कर कोई

और नहीं जग की सुन्दरता

अमर हो गए लोग वो सारे

जिन्होंने था इसको परखा।

अपनी ही जिद्द-हठ के कारण

जल मरी थी खुद होलिका 

भक्त प्रहलाद तो श्रेष्ठ बने

जीती भक्ति उदारता।

सतरंगी इस दुनिया में

रंग-संग स्नेह बरसता

ये पावन त्योहार मनाएँ

रहे सदा भावों की क्षमता ।

भारती दास ✍️ 


Monday, 16 February 2026

वही वसंत फिर से आया है

 शीत ऋतु की अनुभूति भी 

विकल ग्रीष्म का ताप प्रखर

प्राची की अरुणिम ऊषा सी

जीवन का अनमोल सफर।

नील व्योम की विशाल वक्ष सा

है अगाध विश्वास भरा मन

सहज सुभग अनुराग भरा 

है साँसो का कोमल स्पंदन।

इकतीस वर्ष के पावन संग का

अनगिनत ही एहसास लिए 

वही वसंत फिर से आया है 

उमंग अनंत उत्साह लिए।

भारती दास ✍️ 


Friday, 13 February 2026

याद रखेगा हिन्दुस्तान

 

वह दुखद घड़ी थी

विचलित पल था 

हृदय-हृदय में 

क्षोभ प्रबल था।

निर्दयता और 

क्रूरता के साथ 

था पुलवामा 

हमले का घात।

वीर जवानों को 

मारा असुर था 

दुर्दांत दस्यु का

चरम कहर था।

सात साल हो

गये हैं पूरे 

देश ने चालीस 

जवान थे खोये।

छल से उनकी 

ली थी जान

याद रखेगा 

हिन्दुस्तान।

दिल में कसक है 

टीस दर्द का

मुरझा गया था 

शैशव गृह का।

प्रेम का उत्सव 

मनाये आज

वीर शहीदों को 

करके याद।

उनके अनुदान से

है यह देश सुरक्षित 

उनको भावपूर्ण 

श्रद्धा है अर्पित।

भारती दास ✍️ 



Thursday, 29 January 2026

प्रगति पथ के कर्मवीर को

 प्रगति पथ के कर्मवीर को

कोई रोक नहीं सकता है 

प्रयास रत वह हरदम रहता 

श्रम को श्रम से जोड़ ही लेता।

कोई भी काम अचानक नहीं होता 

संघर्ष निरंतर करना पड़ता 

भ्रम प्रवंचना चलता रहता 

अवसर को सौभाग्य बनाता।

उसी का मस्तक उज्जवल दिखता 

विश्वास जिसका सुमंगल होता 

आशा की आलोक दिखाकर 

धैर्य शस्त्र रखने को कहता।

उद्यम करनेवाला ही तो 

सुंदर राह पर चलता है 

एक क्षण भी व्यर्थ न जाए

काम नेक करता रहता है।

श्रेय पथ पर चलकर ही 

निज आत्मबल को बढ़ाता है 

श्रेष्ठ व्यक्तित्व का स्वामी बनकर

सबके दिलों में बस जाता है।

माँ शारदे शक्ति सबल दे

उस व्यक्ति को मति विमल दे

सदय हृदय में शब्द विरल दे

सद्विचार सुंदर निश्छल दे।

भारती दास ✍️

Tuesday, 20 January 2026

जय ज्ञानदा वर्णेश्वरी


नमामि नित्यम विद्यादायिनी

जय शारदे जय सरस्वती 

ब्रह्मचारिणी-ब्रह्मवादिनी 

जगव्यापिनी जय भारती 

भय-विनाशिनी आर्त-नाशिनी

मंजू मुख जय भगवती 

पद्मवासिनी-वीणाधारिणी

जय कुमुदी वागेश्वरी

हंसवाहिनी-मधुरहासिनी

ब्रह्माप्रिया जय विशालाक्षी 

वर प्रदायिनी सर्व दायिनी

जय ज्ञानदा  वर्णेश्वरी

भजामि नित्यम सौभाग्य दायिनी 

जय चंद्रिका परमेश्वरी।

भारती दास ✍️