Saturday, 17 June 2017

उन श्रेष्ठ पिता के चरणों



देकर अपने नाम सदा ही
जिसने हमें तराशा
इक कोमल स्पर्श को पाकर
तन-मन जिसका हर्षा.
दृष्टि में कोमलता भरकर
जिसने सिखाई भाषा
देख के इक सुन्दर स्मित को
जिसने बोई आशा.
जिनके भावों के तूली से
भावुकता का प्रवाह हुआ
जिनके मौन संवेदन से
रोम-रोम आबाद हुआ.
ये देह-प्राण उर-स्पंदन
जिनके लिए है रोता
उन श्रेष्ठ पिता के चरणों में
झुकता रहेगा माथा.         

Sunday, 11 June 2017

बाल-कविता



बाय-बाय नानी बाय-बाय दादी
ख़त्म हुयी सारी आजादी...
इतनी सुन्दर इतनी प्यारी
बीत गयी छुट्टी मनोहारी
खुल गये स्कूल ख़ुशी है आधी
खत्म हुयी सारी आजादी ...
तेज धूप में दौड़ लगाते
मीठे आम रसीले खाते
अब बस्तों ने नींद उड़ा दी
ख़त्म हुयी सारी आजादी...
बहुत हुयी मौजे मनमानी
अनगिनत मस्ती शैतानी
अब उमंग पढने की जागी
ख़त्म हुयी सारी आजादी ...