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Friday, 30 January 2015

मेरी बेटी


यह अहो भाग्य है मेरा
जो बेटी का आगमन हुआ
दिल की चिर संचित आशा
ईश्वर तुमने पूरा किया .
इंतजार थी कई दिनसे
अत्यंत ख़ुशी हुई तुमसे मिलके
पूर्ण हुई अभिलाषा मेरी
अरमान और आकांक्षा मेरी .
आई है तो  दिखला देना
दुनिया को क्षमताएं अपना
क्योंकि लोग चाहते हैं केवल
बेटों के पीछे ही मरना .
क्या अंतर है बेटी-बेटा में
लहरों या धाराओं में
जिन्हें लिए चलती है सदा  
नदिया अपने आँचल में .
बेटी-बेटा तो  दोनों ही है
इस वसुंधरा के लाल
फिर क्यों लोग उन्हें देखे
अलग-अलग नजर डाल .
ऐ बेटी पूर्ण हो सपना तेरी
दुनिया की हर मंजिल हो तेरी
सफलता और सौभाग्य मिले
         दुआ हमारी पल-पल  रहे .