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Friday, 26 September 2014

आई माता शेरावाली


शरद ऋतू की सुन्दर वेला
मनभावन मौसम अनुकूला
प्रकृति की ये छटा निखरती
मीठी मीठी हवा बिखरती
खुशियाँ हरपल छाई रहती
उमंग तरंग समायी रहती
नौ दिनों तक पूजन होती
माँ दुर्गे की अर्चन होती
आई माता शेरावाली
बाधा व्यथा मिटानेवाली
महिषासुर को मारनेवाली
राम को विजय दिलानेवाली
दयामयी अम्बे की जय हो
पथ दिखाओ अब न भय हो
रोम रोम से करूँ पुकार
     निज बाँहों को दो ना पसार.