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Thursday, 21 April 2016

रामदूत तुम्हें कहाँ विश्राम



हे पवनपुत्र तुम बल के धाम
स्वीकार करो हनुमान प्रणाम , हे.....
ज्ञानियों में अग्र तुम्ही हो
सरल कृपालु नम्र तुम्ही हो
भक्त तुम्ही से है बलवान
स्वीकार करो हनुमान प्रणाम , हे......
जनक-सुता से आशीष लेकर
सौभाग्य बनाये सिंदूर मलकर
विशाल-लाल तन वज्र समान
स्वीकार करो हनुमान प्रणाम , हे......
राम-काज करने को तत्पर
सेवक-प्रिय तुम रहते हरपल
रामदूत तुम्हें कहाँ विश्राम
स्वीकार करो हनुमान प्रणाम , हे......
कलुष-क्लेश-संशय-विकार
मन के कष्ट मिटाओ अपार
तुमपर गर्व करते श्रीराम
स्वीकार करो हनुमान प्रणाम , हे .......