Friday, 7 March 2025

नारी चेतना


जब तक थी वो घर के अंदर

दुनिया कोसती रहती अक्सर

आज दहलीज के पार है

करती सपने साकार है ।

जमीन अपनी तलाशती हुई

साहस का परिचय देती हुई

हर -क्षेत्र में महिला छाई आज

उनसे जाग्रत हुई समाज ।

पराबलंबन छोड़ चुकी है 

तन और मन को जोड़ चुकी है

नारी है सुन्दरतम रचना 

ना कोई क्षोभ ,ना कोई छलना।

जिस घर में नारी का पूजन

उस घर को प्रभु करते वंदन

अहं छोड़ कर उसे अपनाये

अपना घर जन्नत  सा बनाये ।


भारती दास ✍️

4 comments:

  1. महिला दिवस पर सुंदर सृजन

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    1. धन्यवाद अनीता जी

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  2. सुंदर काव्य सृजन

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  3. धन्यवाद सर

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