BHARTI DAS
Saturday, 13 May 2017
माँ की महत्ता समझ में आये
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पूर्ण-चन्द्र की शीतलता सी खिले-पुष्प की कोमलता सी मृदुल-स्नेह की विह्वलता सी ईश की अनुपम सुन्दरता सी. दायित्व निभाती हर पल सार...
Monday, 8 May 2017
ठहर जाओ घड़ी भर तुम
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ठहर जाओ घड़ी भर तुम जरा ये देख ले आँखें थे सबके प्राण से प्यारे किये अर्पण जो तुम सांसे. जहाँ रौनक सवेरे थी वही अब कंज मुरझाय...
Sunday, 30 April 2017
श्रमेव जयते
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प्रथम किरण जब भू को छूती जब विहग-बालिके करती शोर मौन होकर श्रमिक निकलते कार्य वे करते भाव-विभोर. जेठ की तपती धूप वे सहते बार...
Sunday, 19 March 2017
चाँद फिर झांका खिड़की से
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चाँद फिर झांका खिड़की से विहंस उठा मेरी झिड़की से चाँद फिर झांका खिड़की से.... चुपके चुपके दबे पांव से वो आता हर शहर गांव से मन...
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