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Thursday, 20 August 2015

तुलसी के मानस में राम



ह्रदय के सुन्दरतम भूमि में
जिनके बुद्धि हुये महान
मेघ रूप वो साधु बनकर
बरसाये मंगल घट गान.
सुन्दर शीतल सुखदाई सम
मानसरोवर के वो नाम
मंगलकारी तुलसी जी के
मानस में रहते हैं राम.
जनहित के हर सूत्र पिरोकर
युग प्रश्नों का कर समाधान.
भक्ति साधना की अनुभूति से
निहाल होते हैं विवेकवान.
बहुरंगे कमलों का दल हो
वैसे दोहा छंद की पंक्ति
सुन्दर भाव अनुपम सी भाषा
जैसे पराग सुगंध की शक्ति.
बंधकर भी निर्बंध रहे जो
मोहपाश में कभी ना आये 
कष्ट सहिष्णु परम भक्त वो
खल गण के भी उर में समाये.
निर्मल मन ही वह माली है
जिस पर ज्ञान का लगता फूल
भगवत्प्रेम के जल से सींचकर
कुटिल मन होते अनुकूल.
राम चरित को रचने वाले
उन चरणों में नमन अनेकों 
मानस के सातों सीढी से
जीवन सार दिये हैं सबको.