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Wednesday, 22 October 2014

आलोक बिखरे उजास की



आलोक हो आभास की
तमस में उजास की
स्नेह युक्त आश की
सुखमय सुबास की .
आलोक हो स्वच्छंद की
मन की उमंग की
ह्रदय की तरंग की
सुरभित सुगंध की .
आलोक हो उत्साह की
शक्तियां प्रवाह की
अश्रु न हो आह की
विकृति ना हो चाह की .
आलोक हो सम्मान की
भाव हो कल्याण की
अपनी स्वाभिमान की
चिंतन और ज्ञान की .
आलोक हो विश्वास की
बोध और एहसास की
स्मित और सुहास की
आनंदमय प्रकाश की .
 
दिवाली की हार्दिक शुभकामना