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Thursday, 28 August 2014

गणपति विनती


हे दयामय हे करुनामय सुन विनय मेरे सुरपति
तेरे दर पर आकर बैठी आन रख मेरे गणपति
शिव-शंकर के नंदन हो तुम
दीन-दुखी के वंदन हो तुम
हे लम्बोदर हे महोदर निर्बल के तुम हो शक्ति ,तेरे ....
सारे जग के संकट-नाशक
विघ्न-विनाशक मंगलकारक
हे सुरनायक हे सुखदायक तुम करुणा के हो मूर्ति ,तेरे ....
मुँह ना मोड़ो आस ना तोड़ो
रहो सहायक साथ ना छोड़ो
हे गजानन उर के पावन पद-पंकज में शीश झुकी ,तेरे .....    
                                        हे दयामय...