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Sunday, 25 May 2014

काँटों पर चलकर मिली है ताज



गली-गली गावों से गुजरा
शूल भरी राहों से निकला
दोस्तों से भी मिलकर देखा
दुश्मन ने किया अनदेखा
सबने चलाया व्यंग्य का बाण
ह्रदय छलनी हुआ तमाम
एक ही सीख मिली जो सीखा
मेहनत लगन परिश्रम सींचा
दुनिया ने गले लगाया
हर मुश्किल से हमें बचाया
कोई देखे इन आखों से
छलक उठा है मन-.भावों से
अब अलगाव कभी न होगा
बदले का भाव कभी न होगा
इतना आदर इतना अपनापन
सूने मन का वो सूनापन
अब जग की सुन्दरता निराली
मिली सफलता खुशियों वाली
हुई तपस्या सफल मुराद
विधि ने सुन ली सब फरियाद
बहुत ख़ुशी का दिन है आज
            काँटों पर चलकर मिला है ताज.