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Sunday, 18 May 2014

जिम्मेदारी निभाना होगा




इस चुनाव के महा समर से
राजनीति के रण-भंवर से
एक नायक ऐसा है निखरा
महानायक का बांधा सेहरा
तरह-तरह की आई चुनौती
अनवरत गयी वो चलती
सहमती-सिसकती सारी फिजायें
मनके अन्दर भरी व्यथायें
पग-पग पर दिखता आक्रोश
बढ़ता रहा मंतव्य और रोष
दीन हीन सा पथ पुकारे
कोई आये हमे संवारे
पल पल सबकी राह निहारे
सबने किये केवल प्रण सारे
बहुत हो गया हाहाकार
मिटे स्वार्थ और भ्रष्टाचार
इतिहास ने वो दौर दिखाया
देश का सिरमौर बनाया
समय की धारा चीर के निकला
पंक से पंकज खिलकर फैला
सारे देश में एक सा हाल
जन से जन का मिला ख्याल
महाकाल ने दिया है साथ
जन सैलाब ने पकड़ा हाथ
उस नेता का करें हम स्वागत
जिसने विकास की दी है आहट
आश टूटे न दिल हो आहत
बढे देश की गरिमा ताकत
एक हो भारत श्रेष्ठ हो भारत
हो सुन्दर अपना ये भारत
अब वो कर्ज चुकाना होगा
जिम्मेदारी निभाना होगा