Sunday, 25 May 2014

काँटों पर चलकर मिली है ताज



गली-गली गावों से गुजरा
शूल भरी राहों से निकला
दोस्तों से भी मिलकर देखा
दुश्मन ने किया अनदेखा
सबने चलाया व्यंग्य का बाण
ह्रदय छलनी हुआ तमाम
एक ही सीख मिली जो सीखा
मेहनत लगन परिश्रम सींचा
दुनिया ने गले लगाया
हर मुश्किल से हमें बचाया
कोई देखे इन आखों से
छलक उठा है मन-.भावों से
अब अलगाव कभी न होगा
बदले का भाव कभी न होगा
इतना आदर इतना अपनापन
सूने मन का वो सूनापन
अब जग की सुन्दरता निराली
मिली सफलता खुशियों वाली
हुई तपस्या सफल मुराद
विधि ने सुन ली सब फरियाद
बहुत ख़ुशी का दिन है आज
            काँटों पर चलकर मिला है ताज.         

Sunday, 18 May 2014

जिम्मेदारी निभाना होगा




इस चुनाव के महा समर से
राजनीति के रण-भंवर से
एक नायक ऐसा है निखरा
महानायक का बांधा सेहरा
तरह-तरह की आई चुनौती
अनवरत गयी वो चलती
सहमती-सिसकती सारी फिजायें
मनके अन्दर भरी व्यथायें
पग-पग पर दिखता आक्रोश
बढ़ता रहा मंतव्य और रोष
दीन हीन सा पथ पुकारे
कोई आये हमे संवारे
पल पल सबकी राह निहारे
सबने किये केवल प्रण सारे
बहुत हो गया हाहाकार
मिटे स्वार्थ और भ्रष्टाचार
इतिहास ने वो दौर दिखाया
देश का सिरमौर बनाया
समय की धारा चीर के निकला
पंक से पंकज खिलकर फैला
सारे देश में एक सा हाल
जन से जन का मिला ख्याल
महाकाल ने दिया है साथ
जन सैलाब ने पकड़ा हाथ
उस नेता का करें हम स्वागत
जिसने विकास की दी है आहट
आश टूटे न दिल हो आहत
बढे देश की गरिमा ताकत
एक हो भारत श्रेष्ठ हो भारत
हो सुन्दर अपना ये भारत
अब वो कर्ज चुकाना होगा
जिम्मेदारी निभाना होगा               

Monday, 12 May 2014

गंगा तेरी शरण में




गंगा तेरी शरण में आया
तन-मन-धनसे तुझको ध्याया
माँ सुन लो मन की पुकार
बन जाऊँ पी.एम.एक बार....
तेरे शीतल निर्मल जल से
पाप-कलंक मैं धोया मन से
रखता हूँ मैं स्वच्छ विचार
बन जाऊँ पी.एम.एक बार ....
करूँ प्रतिज्ञा वादे और प्रण
जब तक है ये मेरा जीवन
देश बढेगा सौ-सौ बार
बन जाऊँ पी.एम.एक बार ....
मैंने अपना सब कुछ छोड़ा
जान हथेली पर ले दौड़ा
आज वक्त की यही पुकार
बन जाऊँ पी.एम.एक बार ....
तेरे जल में डूब मरूँगा
खाली हाथ नहीं जाऊंगा
यही प्रार्थना यही गुहार
बन जाऊँ पी.एम.एक बार ....
चरणों में ये सर झूका है
अब पीड़ा से मन थका है
दे-दे मैया स्नेह-दुलार
                बन जाऊँ पी.एम.एक बार .....