Saturday, 25 January 2014

भारत देश हमारा




 ये देश हमारा भारत वर्ष
अद्भुत है इसका उत्कर्ष
उत्तर में है हिम का ताज
दक्षिण में सागर का राज
सदियों से ही दुःख है झेले
मुगलों ,अंग्रेजों के झमेले
सबने इसको लूटा-मसला
पैरो से रौंदा और कुचला
सहती रही असंख्य क्लेश
पीड़ित-थकित थे नेत्र निमेष
सर चढकर जब बोला जूनून
क्रांति- वीर  बहाया खून
बाजी लगायी प्राणों की अपने
एक से बढ़कर बलिदानों ने
भारत के दामन को बचाया
सर कटा सम्मान दिलाया
उदार मन और शांत प्रकृति
दया धर्म से शोभित धरती
ऋषि मुनि सा देव विभूति
खो गयी  वो अमूल्य संस्कृति
वीर भरत- महराणा जैसे
सुभाष –भगत सयाना जैसे
कोई  वीर  नहीं  है  शेष
जो धारण करले राम का वेश
बापू की नीति याद नहीं है
दुःख नहीं फरियाद नहीं है
भारत पुत्रों को करके याद 
गणतंत्र दिवस मनाये आज

Monday, 13 January 2014

मकर-संक्राति


एक त्यॊहार कई है नाम ,
भारत कीहै यही पहचान,
मकर-संक्राति,पोंगल,लॊहिडी़ ,
कहीं पर बनता स्वादिष्ट खिचड़ी,
खुशियाँ बांटे , ख़ुशी मनाये  
तिल की मीठी लड्डू खायें  ,
आसमान में चढ़ी पतंगे,
सपनों के उड़ान भरने ,
डोर की जोर पर चढ़ती गयी,
होड़ ही होड़ में बढती गयी,
व्योम के सारे पक्षी तमाम,
'
जी सके ' है यही पैगाम ,
चिड़ियाँ  सब  भी जी पाये
सब कोई  मस्ती कर पाये .

.
HAPPY MAKARSANKRANTI

Monday, 6 January 2014

हे भारत मत भूलो कभी



हे भारत मत भूलो कभी
ये गौरव –गाथा है तेरे ही
सीता –सावित्री –दमयंती सी
नारी के आदर्श अभी भी
सर्वत्यागी नाथ शंकर
उपासना करते है जी भर
वो तुम्हारे हैं अभी भी
मत भूलना तुम कभी भी .
चंडाल –ब्राम्हण और दरिद्र भी
सब तेरे सुत हैं  अभी भी
गंभीर संकट है कोई भी
हल समस्या का सभी ही
करते है कुछ लोग अब भी
वो तुम्हारे है अभी भी
मत भूलना तुम कभी भी .
माता ही सर्वस्व यहाँ पर
जान देते पुत्र उन पर
व्यक्तिगत कोई कभी भी
जीवन नहीं जीता कहीं भी
स्वदेश-मंत्र पढता अभी भी
शहीद होते आज अब भी
वो तुम्हारे हैं अभी भी
मत भूलना तुम कभी भी
वो तेरे अमृत वचन भी
दिल में रखें है अभी भी
फूंकते है प्राण अब भी
सिंह जैसा वीर जब भी
कांपते है रंक अब भी
देश –भक्ति मन में अब भी
उत्कृष्ट –चिंतन संस्कृति भी
देव जैसा मनुज अब भी
वो तुम्हारे है अभी भी
मत भूलना तुम कभी भी .